बिहार के कैमूर जिले में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कुत्तों के काटने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। सुबह की सैर, स्कूल जाने वाले बच्चों का सफर या शाम को बाजार की आवाजाही—हर जगह लोगों में डर का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले छह महीनों में 5,600 से अधिक लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो चुके हैं।
हर महीने बढ़ रहे हैं डॉग बाइट के मामले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनवरी से जून के बीच डॉग बाइट के मामलों की संख्या लगातार चिंताजनक बनी रही। जनवरी में 1,399, फरवरी में 1,523, मार्च में 1,449, अप्रैल में 1,005, मई में 960 और जून में 1,263 लोग कुत्तों के काटने के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। सदर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 55 से 60 मरीज एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं, जिनमें बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक है।

शहर से गांव तक फैला डर
भभुआ, मोहनियां, रामगढ़, चैनपुर, भगवानपुर और कुदरा सहित जिले के कई क्षेत्रों से डॉग बाइट के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मोहल्लों में आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते हैं। रात के समय उनका आक्रामक व्यवहार और बढ़ जाता है। कई बार वे बाइक और साइकिल सवारों का पीछा करते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।
क्यों बढ़ रही है समस्या?
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि खुले में पड़े कूड़े के ढेर और बचा हुआ भोजन आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने की प्रमुख वजह हैं। पर्याप्त नियंत्रण व्यवस्था और नसबंदी कार्यक्रमों की कमी भी इस समस्या को गंभीर बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन में सुधार से इस चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डॉग बाइट होने पर क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट ले, तो सबसे पहले घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोएं। इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाएं। डॉक्टर द्वारा निर्धारित सभी डोज समय पर लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि अधूरा उपचार संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है।
प्रशासन और लोगों की साझा जिम्मेदारी
सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी प्रसाद ने बताया कि सदर अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है और मरीजों को पूरी वैक्सीनेशन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने, कचरा प्रबंधन सुधारने और जागरूकता अभियान चलाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

