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Tuesday, July 21, 2026
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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच किसानों को राहत: बुवाई के लिए पर्याप्त बीज और खाद का भरोसा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए भरोसा दिलाया है कि आगामी खरीफ सीजन के लिए देश में बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की कोई कमी नहीं होगी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से साफ किया गया है कि देश की कृषि प्रणाली आत्मनिर्भर है और किसी भी बाहरी संकट का असर खेती पर नहीं पड़ेगा।

सरकार के अनुसार, खरीफ 2026 के लिए देश में बीजों की स्थिति काफी मजबूत है। कुल आवश्यकता लगभग 166.46 लाख क्विंटल आंकी गई है, जबकि उपलब्धता 185.74 लाख क्विंटल से अधिक है। यानी करीब 19.29 लाख क्विंटल का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है। इस मजबूत व्यवस्था में ICAR और निजी क्षेत्र दोनों की अहम भूमिका है, जो बीज उत्पादन और वितरण को सुनिश्चित करते हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि उर्वरकों की उपलब्धता स्थिर है। खरीफ सीजन के लिए कुल 390.54 लाख मीट्रिक टन खाद की जरूरत का अनुमान है, जिसमें से करीब 46% पहले से ही ओपनिंग स्टॉक के रूप में मौजूद है। इसके अलावा, LPG और PNG की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि मक्का जैसे फसलों के बीज सुखाने की प्रक्रिया प्रभावित न हो।

कीटनाशकों और अन्य कृषि रसायनों की भी पर्याप्त उपलब्धता है। अप्रैल से फरवरी 2026 के दौरान देश में 2.61 लाख मीट्रिक टन पेस्टिसाइड का उत्पादन हुआ, जो मांग से काफी अधिक है। सरकार नकली और मिलावटी उत्पादों पर भी सख्त निगरानी रख रही है, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण सामग्री मिल सके।

साथ ही, सरकार टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए नैनो फर्टिलाइजर, बायो फर्टिलाइजर और इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (IPM) जैसे उपायों को प्रोत्साहित कर रही है। कई राज्यों में खाद की बिक्री को किसान डेटाबेस से जोड़ा जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और नियंत्रण बेहतर हो सके।

सरकार का कहना है कि टमाटर, प्याज और आलू जैसी प्रमुख फसलों की कीमतें भी फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव के बावजूद भारत की कृषि व्यवस्था मजबूत स्थिति में है और किसानों को किसी भी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है।

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