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Tuesday, August 18, 2026
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गोरखपुर में बनेगा ₹1303 करोड़ का राप्ती रिवर फ्रंट, पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

गोरखपुर में पर्यटन और शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए राप्ती नदी के किनारे एक महत्वाकांक्षी रिवर फ्रंट परियोजना प्रस्तावित की गई है। राजघाट से डोमिनगढ़ तक लगभग 3.5 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में बनने वाले इस रिवर फ्रंट पर करीब 1303 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना की डीपीआर (DPR) तैयार हो चुकी है और अब आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

गोमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर होगा विकास

गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ने राप्ती नदी के तट पर इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है। योजना के तहत राजघाट से डोमिनगढ़ तक राप्ती नदी के किनारे आधुनिक सुविधाओं से युक्त रिवर फ्रंट विकसित किया जाएगा। परियोजना को तीन चरणों में पूरा करने की योजना बनाई गई है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर बनी योजना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद इस परियोजना की रूपरेखा तैयार की गई। डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी GDA को दी गई थी। इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) प्रक्रिया के माध्यम से वाराणसी की उस फर्म का चयन किया गया जिसने नमो घाट के विकास का कार्य भी किया था। ग्राउंड सर्वे के बाद फर्म ने डीपीआर तैयार कर GDA को सौंप दी है।

गोरखपुर में बनेगा ₹1303 करोड़ का राप्ती रिवर फ्रंट, पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?

राप्ती रिवर फ्रंट पर कई आधुनिक और पर्यटन केंद्रित सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें प्रमुख रूप से:

  • अर्बन हाट
  • योगा सेंटर
  • कन्वेंशन सेंटर
  • ओपन पब्लिक स्पेस
  • ग्रीन बेल्ट
  • लैंडस्केपिंग
  • पार्क और कियोस्क
  • बोटिंग के लिए प्लेटफॉर्म
  • सड़क और ड्रेनेज व्यवस्था

परियोजना के तहत नदी से हर्बर्ट बांध तक लगभग 150 मीटर चौड़ाई में विकास कार्य किए जाएंगे।

बाढ़ और पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनेगी योजना

राप्ती नदी के किनारे रखरखाव की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की होने के कारण GDA और सिंचाई विभाग संयुक्त रूप से परियोजना के तकनीकी पहलुओं पर काम करेंगे। विशेष रूप से बाढ़ के दौरान संरचनाओं की सुरक्षा और जलस्तर कम होने पर उपयोग की रणनीति तैयार की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर डीपीआर में तकनीकी संशोधन भी किए जा सकते हैं।

अतिक्रमण रोकने के लिए पहले ही उठाए गए कदम

राप्ती नदी और हर्बर्ट बांध के बीच का क्षेत्र डूब क्षेत्र में आता है। इसी कारण इस इलाके में अनियंत्रित निर्माण और अतिक्रमण रोकने के लिए पहले से ही रजिस्ट्री प्रक्रिया को विभिन्न विभागों की अनापत्ति (NOC) से जोड़ा गया है, ताकि भविष्य में परियोजना के क्रियान्वयन में बाधा न आए।

राप्ती रिवर फ्रंट परियोजना गोरखपुर के पर्यटन, पर्यावरण और शहरी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। हालांकि फिलहाल डीपीआर तैयार हुई है और परियोजना को अंतिम मंजूरी, फंडिंग तथा तकनीकी समीक्षा जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना बाकी है। इन चरणों के पूरा होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

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