श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की बतौर पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्ति के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता उदित राज ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि बीजेपी ने इसे मंदिर प्रबंधन में पेशेवर क्षमता बढ़ाने वाला कदम बताया।
जितेंद्र मिश्रा बने पहले CEO
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। वायुसेना में उनका लंबा और उल्लेखनीय करियर रहा है।
ट्रस्ट की ओर से यह नियुक्ति अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े बढ़ते प्रशासनिक और प्रबंधन कार्यों को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
उदित राज ने चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता और पूर्व लोकसभा सांसद उदित राज ने नियुक्ति पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक मिश्रा की जगह दूसरे मिश्रा को लाया गया है।
राज ने दावा किया कि यह वास्तविक चयन प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि कई दिनों तक चला एक नाटक था। उनके मुताबिक, ट्रस्ट ने योग्य व्यक्ति को CEO बनाने की बात कही थी, लेकिन निर्णय पहले से तय था। उन्होंने इसे RSS से जोड़ते हुए ट्रस्ट के प्रशासनिक नेतृत्व में सामाजिक प्रतिनिधित्व पर भी सवाल उठाए।

सैन्य अनुभव बनाम सिविल प्रशासन
उदित राज ने जितेंद्र मिश्रा के सैन्य करियर की तारीफ करते हुए कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि उनका पेशेवर रिकॉर्ड शानदार रहा है। हालांकि उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि मंदिर ट्रस्ट का कामकाज सिविल सोसाइटी और प्रशासनिक प्रबंधन से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि IRS, डिफेंस अकाउंट्स, फाइनेंस या एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस जैसे क्षेत्रों के अनुभवी लोगों पर भी विचार किया जा सकता था।
सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल
कांग्रेस नेता ने ट्रस्ट के प्रबंधन में OBC और दलित समुदायों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि भगवान राम सभी के हैं और हिंदू धर्म भी सभी का है, इसलिए नेतृत्व और संस्थागत व्यवस्थाओं में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने RSS के नेतृत्व में लंबे समय से एक ही जाति के प्रतिनिधित्व का भी जिक्र किया और व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व की मांग उठाई।
बीजेपी ने नियुक्ति को बताया सकारात्मक कदम
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने नियुक्ति का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने सभी व्यवस्थाओं, उपयोगिता और दक्षता को ध्यान में रखकर निर्णय लिया होगा।
त्रिवेदी के मुताबिक, रिटायर्ड एयर चीफ मार्शल की नियुक्ति से ट्रस्ट के कामकाज में पेशेवर क्षमता, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट में अन्य सदस्यों की नियुक्तियां भी हुई हैं, जिससे उसकी कार्यक्षमता और प्रभाव बढ़ने की उम्मीद है।
नियुक्ति ने छेड़ी बड़ी बहस
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति अब केवल प्रशासनिक फैसला नहीं रह गई है। इसके साथ चयन प्रक्रिया, पेशेवर योग्यता और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे सवाल भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गए हैं।
एक तरफ इसे राम मंदिर के बढ़ते प्रबंधन को पेशेवर बनाने की कोशिश बताया जा रहा है, वहीं विपक्ष नियुक्ति की प्रक्रिया और प्रतिनिधित्व पर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में ट्रस्ट का कामकाज ही बताएगा कि यह नया प्रशासनिक ढांचा अयोध्या में मंदिर से जुड़ी बढ़ती जिम्मेदारियों को किस तरह संभालता है।

