अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के अयोध्या दौरे के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केजरीवाल के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। दोनों नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप ने इस मुद्दे को नई राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
अयोध्या पहुंचकर केजरीवाल ने किए दर्शन
शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल अयोध्या पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी में पूजा-अर्चना की। उनके दौरे का केंद्र राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा विवाद को लेकर उठे सवाल रहे। दर्शन के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की कि कथित अनियमितताओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

योगी आदित्यनाथ का तीखा पलटवार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली की जनता ने उन्हें लंबे समय तक अवसर दिया, लेकिन उनकी सरकार ने भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के अलावा कुछ नहीं दिया। उन्होंने दावा किया कि डबल इंजन सरकार ने पिछले वर्षों में अयोध्या का व्यापक विकास किया है और इसे देश-दुनिया के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया है।
आम आदमी पार्टी ने उठाए बड़े सवाल
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि मामले में केवल छोटे स्तर पर कार्रवाई की गई है, जबकि कथित रूप से बड़े जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए ताकि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी सच्चाई सामने आ सके।
सोशल मीडिया पर भी तेज हुई सियासी जंग
अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री योगी पर सीधे सवाल उठाए और कथित आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई। इसके जवाब में बीजेपी नेताओं ने अयोध्या के विकास कार्यों का हवाला देते हुए आम आदमी पार्टी की सरकार पर दिल्ली के विकास को लेकर सवाल खड़े किए। इसके बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बन गया।
जांच और राजनीति दोनों पर रहेगी नजर
राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा विवाद की जांच और इस पर जारी राजनीतिक बयानबाजी दोनों पर अब लोगों की नजर बनी हुई है। जहां एक ओर विपक्ष निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं सत्तापक्ष विकास कार्यों और अपने प्रशासनिक रिकॉर्ड का बचाव कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला सकती हैं।

