पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील अब सिर्फ भाषण तक सीमित नहीं रही। बुधवार को प्रधानमंत्री खुद बेहद छोटे काफिले के साथ कैबिनेट बैठक में पहुंचे और देश को यह संदेश दिया कि संसाधनों की बचत की शुरुआत शीर्ष नेतृत्व से होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में प्रधानमंत्री का काफिला केवल दो गाड़ियों के साथ दिखाई दिया। यह दृश्य इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि आमतौर पर प्रधानमंत्री के काफिले में सुरक्षा मानकों के अनुसार बड़ी संख्या में वाहन शामिल रहते हैं। ऐसे समय में जब देशभर में पेट्रोल और डीजल की खपत को लेकर चिंता बढ़ रही है तब प्रधानमंत्री का यह कदम राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर बड़ा संकेत माना जा रहा है। लोगों के बीच इस पहल को सादगी और जिम्मेदार नेतृत्व की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
पीएम की अपील का असर अब नेताओं पर भी
प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ दिन पहले देशवासियों से अपील की थी कि वे पेट्रोल और डीजल का कम से कम इस्तेमाल करें। उन्होंने मेट्रो। इलेक्ट्रिक बसों। पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कारपूलिंग को बढ़ावा देने की बात कही थी। अब इसका असर सीधे केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों में दिखाई देने लगा है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री सुरक्षा से जुड़े ब्लू बुक प्रोटोकॉल के तहत आमतौर पर 14 से 17 गाड़ियों के काफिले के साथ चलते हैं। कई बार राज्यों की अतिरिक्त सुरक्षा के कारण यह संख्या 30 से 40 तक पहुंच जाती है। लेकिन अब इस व्यवस्था में भी कटौती की जा रही है। प्रधानमंत्री के साथ-साथ कई केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने भी अपने काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम कर दी है। सरकार का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के बीच ईंधन संरक्षण केवल आर्थिक जरूरत नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है।

अमित शाह और राजनाथ सिंह ने भी घटाए वाहन
प्रधानमंत्री की अपील का असर केंद्रीय मंत्रियों पर भी साफ दिखाई दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जो Z+ सुरक्षा श्रेणी में आते हैं उनके काफिले में सामान्य तौर पर 11 गाड़ियां शामिल रहती हैं। लेकिन अब उन्होंने इसे घटाकर केवल चार गाड़ियों तक सीमित कर दिया है। गृह मंत्री अमित शाह भी बुधवार को कैबिनेट बैठक में बेहद छोटे काफिले के साथ पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक उनके सुरक्षा काफिले में भी अब पहले के मुकाबले काफी कम वाहन शामिल किए जा रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की पहल की सराहना करते हुए कहा कि जब नेतृत्व खुद उदाहरण पेश करता है तब वह जनआंदोलन बन जाता है। उन्होंने खुद अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या कम करने का ऐलान किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा समेत कई अन्य नेताओं ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाए हैं। भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी प्रशासनिक बैठकों में ईंधन बचत को लेकर नए निर्देश जारी करने शुरू कर दिए हैं।
देशभर में बन सकता है बड़ा अभियान
प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल को केवल सरकारी व्यवस्था तक सीमित नहीं माना जा रहा बल्कि इसे आने वाले समय में राष्ट्रीय अभियान का रूप दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। सरकार अब वर्चुअल मीटिंग। वर्क फ्रॉम होम और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है। कई राज्यों में सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह अभियान लंबे समय तक जारी रहता है तो इससे न सिर्फ ईंधन की बचत होगी बल्कि प्रदूषण और सरकारी खर्च में भी बड़ी कमी आ सकती है। सोशल मीडिया पर भी प्रधानमंत्री के छोटे काफिले का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे प्रतीकात्मक लेकिन मजबूत संदेश मान रहे हैं। अब देशभर की नजर इस बात पर है कि क्या यह पहल आम जनता के व्यवहार में भी बड़ा बदलाव ला पाएगी।

