पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर जारी अंदरूनी खींचतान अभी खत्म होती नहीं दिख रही है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का गुट पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर लगातार दबाव बनाए हुए है। शनिवार को पार्टी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने चंडीगढ़ में चन्नी और उनके समर्थक नेताओं से मुलाकात की और उनकी राय जानी। अब बघेल अपनी रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को सौंपेंगे, लेकिन उससे पहले चन्नी गुट अपनी मांगों को मजबूती से उठाता रहेगा।
राजा वडिंग को हटाने की मांग पर कायम है चन्नी गुट
सूत्रों के अनुसार शनिवार की बैठक में चन्नी गुट के लगभग 15 वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया जाए। बैठक के दौरान चरणजीत सिंह चन्नी ने नेताओं से हाथ उठवाकर इस मांग पर समर्थन भी लिया। बताया जा रहा है कि सोमवार को चन्नी अपने समर्थक नेताओं के साथ एक और बैठक कर सकते हैं, ताकि केंद्रीय नेतृत्व के फैसले से पहले अपना राजनीतिक दबाव बनाए रखा जा सके।

हाईकमान पहले ही दोहरा चुका है अपना फैसला
कांग्रेस ने 1 जुलाई को अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को दोबारा पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया था। वहीं चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। हालांकि राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से चन्नी नाराज हैं। इसी कारण उन्होंने पहले भूपेश बघेल की बैठकों से दूरी बनाए रखी थी। बाद में हुई बैठक में उन्होंने अपने गुट की ओर से नेतृत्व परिवर्तन की मांग खुलकर सामने रखी।
हाईकमान की रिपोर्ट पर टिकी हैं सबकी निगाहें
बताया जा रहा है कि करीब 80 मिनट तक चली बैठक में 12 से अधिक विधायक और 80 से ज्यादा नेता शामिल हुए। सभी ने संगठनात्मक मुद्दों और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर अपनी बात रखी। अब कांग्रेस हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती पंजाब में संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की होगी। आने वाले दिनों में भूपेश बघेल की रिपोर्ट और पार्टी नेतृत्व का फैसला यह तय करेगा कि पंजाब कांग्रेस का नेतृत्व विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

