इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। घरेलू बाजार लाल हो गए और निवेशकों की बेचैनी बढ़ गई। प्रमुख सूचकांक BSE सेंसेक्स में 2,743 अंक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 दिन की शुरुआत में लगभग 519 अंक नीचे खुला। लगातार बिकवाली की लहर ने बाजार में दबाव बढ़ा दिया। विशेषज्ञों ने पहले ही इस दबाव का अनुमान लगाया था। मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल, सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आई है और मुद्रा बाजार में रुपये की कीमत भी गिर गई है।
निवेशकों के लिए बड़ा झटका: 17.50 लाख करोड़ का नुकसान
शेयर बाजार में तेज गिरावट ने सीधे तौर पर निवेशकों की संपत्ति पर असर डाला। आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को BSE का कुल मार्केट कैप ₹4,63,50,671.27 करोड़ था। लेकिन सोमवार को बाजार खुलते ही यह गिरकर ₹4,45,91,660.60 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब है कि सिर्फ कुछ ही मिनटों में निवेशकों के करोड़ों रुपए बाजार से उड़ गए। इस गिरावट ने निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाया है और बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है।

डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर भारतीय रुपये पर भी दिखा। रुपये ने डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति बनाए नहीं रखी और 91 रुपये प्रति डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया। यह पिछले महीने का सबसे कमजोर स्तर है। ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच तनाव के बढ़ने से निवेशकों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी रुपये को कमजोर किया और मुद्रा बाजार में दबाव बढ़ाया।
सबसे ज्यादा प्रभावित हुए शेयर
BSE में सबसे अधिक नुकसान Larsen & Toubro (L&T) के शेयरों में देखा गया, जो 5.69 प्रतिशत गिर गए। इसके अलावा, इंडिगो के शेयर 4.30 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे थे। अडानी पोर्ट्स, मारुति और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय निवेशक सतर्क रहें और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान दें।

