उत्तर प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य इन दिनों तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है और चुनावी माहौल की गर्माहट साफ महसूस की जा रही है। नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से आक्रामक रूप देने की रणनीति अपनाई है। पार्टी इसे केवल एक विधायी असफलता नहीं बल्कि भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव के अवसर के रूप में देख रही है। इसी कारण प्रदेश में लगातार बड़े स्तर पर कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों को गति दी जा रही है ताकि महिलाओं के बीच मजबूत राजनीतिक संदेश पहुंचाया जा सके।
योगी और मोदी की लगातार सक्रियता से बढ़ा राजनीतिक संदेश
प्रदेश में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की सक्रियता ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 21 अप्रैल को अपने आवास से दोनों उपमुख्यमंत्रियों के साथ तेज धूप में पदयात्रा पर निकले, जिसे जनता से सीधे जुड़ाव का प्रयास माना जा रहा है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 29 अप्रैल को वाराणसी में बड़ा कार्यक्रम प्रस्तावित है जहां लगभग 50 हजार महिलाओं की उपस्थिति में वे जनसभा को संबोधित करेंगे। यह आयोजन केवल राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का भी मंच माना जा रहा है। इसके अगले ही दिन हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण कार्यक्रम के जरिए विकास आधारित राजनीति को और मजबूती देने की तैयारी है।

महिला वोट बैंक पर फोकस और विपक्ष पर सीधा हमला
उत्तर प्रदेश में महिलाओं की आबादी लगभग दस करोड़ के आसपास मानी जाती है और यही कारण है कि भाजपा इस वर्ग को राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मान रही है। नारी शक्ति वंदन विधेयक के गिरने के बाद पार्टी ने विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने अलग अलग क्षेत्रों में महिलाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा इस मुद्दे को केवल संसद तक सीमित नहीं रहने देगी बल्कि इसे जमीन पर भी एक बड़ा जनआंदोलन बनाएगी। यह रणनीति आने वाले चुनावों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विकास और भावनात्मक राजनीति का मिश्रण बना चुनावी हथियार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार उत्तर प्रदेश में सक्रियता को एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है जिसमें भावनात्मक जुड़ाव और विकास दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश की जा रही है। वाराणसी में 28 अप्रैल को होने वाला महिला सम्मान कार्यक्रम पूर्वांचल के कई जिलों तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने का माध्यम बनेगा। वहीं हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण न केवल बुनियादी ढांचे के विकास का प्रतीक है बल्कि पश्चिम और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले बड़े विजन को भी दर्शाता है। पार्टी संगठन पहले से ही इन कार्यक्रमों की तैयारियों में जुटा हुआ है और इसे आगामी चुनावों के लिए मजबूत राजनीतिक आधार के रूप में देखा जा रहा है।

