भारत लगातार तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में खुद को साबित कर रहा है। जहां विश्व की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मंदी और अनिश्चितताओं का सामना कर रही हैं, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती के साथ अपना प्रदर्शन जारी रखा है। भारत के 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य के बीच, वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर महत्वपूर्ण पूर्वानुमान प्रस्तुत किया है, जो देश की विकास कहानी को और मजबूत करता है। मूडीज के अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मजबूत घरेलू उपभोग, नीति समर्थन और स्थिर बैंकिंग प्रणाली के कारण भारत जी20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
मूडीज के बैंकिंग सिस्टम आउटलुक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर बैंकिंग क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता मजबूत बनी रहेगी। हालांकि, माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) सेक्टर में कुछ दबाव महसूस किया जा सकता है। इसके बावजूद, बैंक संभावित ऋण घाटे से निपटने के लिए पर्याप्त भंडार रखे हुए हैं। मूडीज का मानना है कि 2026-27 में बैंकिंग सेक्टर के लिए परिचालन वातावरण सकारात्मक रहेगा क्योंकि मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिति और संरचनात्मक सुधारों से बैंकिंग क्षेत्र को लाभ मिलेगा। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि भारत की वृद्धि दर अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से तेज रहेगी, जो मजबूत घरेलू उपभोग और सरकारी नीतियों की वजह से संभव होगी। हालांकि यह अनुमान वित्त मंत्रालय की आर्थिक सर्वेक्षण में दी गई 6.8 से 7.2 प्रतिशत की दर से थोड़ी कम है।

मुद्रास्फीति नियंत्रण में, उपभोक्ता शक्ति बढ़ने से उपभोग को मिलेगा बढ़ावा
मूडीज ने यह भी कहा है कि सितंबर 2025 में GST लागू होने से पहले व्यक्तिगत आयकर सीमा में वृद्धि से उपभोक्ता की खरीद क्षमता बढ़ी है, जो उपभोग आधारित वृद्धि को और अधिक समर्थन देगा। आधिकारिक अनुमान के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत तक हो सकती है, जो 2024-25 में दर्ज 6.5 प्रतिशत से अधिक है। मुद्रास्फीति के संदर्भ में भी मूडीज का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) केवल तभी मौद्रिक नीति में ढील देगा जब अर्थव्यवस्था में स्पष्ट मंदी के संकेत दिखेंगे, क्योंकि मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और आर्थिक विकास मजबूत बना हुआ है। इस साल RBI ने अपनी नीतिगत ब्याज दर कुल मिलाकर 1.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दी है।
आगामी वित्तीय वर्ष में बैंकिंग क्रेडिट वृद्धि और मजबूत आर्थिक संकेत
मूडीज ने यह भी अनुमान लगाया है कि 2026-27 में पूरे बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट वृद्धि 11 से 13 प्रतिशत की सीमा में हो सकती है, जो कि 2025-26 के अब तक के 10.6 प्रतिशत से बेहतर होगी। यह संकेत भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश और उपभोग के विस्तार का परिचायक है। सरकार की नीतिगत पहलें, घरेलू मांग में मजबूती, और वित्तीय संस्थानों की स्थिरता मिलकर भारत को आर्थिक चुनौतियों के बावजूद विकास की राह पर मजबूती से आगे बढ़ा रही हैं। मूडीज की इस रिपोर्ट से भारत की विकास संभावनाओं को लेकर निवेशकों और नीति निर्माताओं में विश्वास बढ़ा है, जो देश के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

