back to top
Tuesday, July 21, 2026
Homeराज्यदिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 3 साल की बच्ची मामले में आरोपी...

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 3 साल की बच्ची मामले में आरोपी की जमानत रद्द

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में तीन वर्षीय बच्ची के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने आरोपी स्कूल कर्मचारी को दी गई जमानत रद्द करते हुए उसे 1 जुलाई दोपहर 2 बजे तक संबंधित POCSO कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। यह आदेश दिल्ली पुलिस और पीड़िता की मां द्वारा दायर जमानत निरस्तीकरण याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया।

हाईकोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का आदेश

मामले में ट्रायल कोर्ट ने 7 मई को आरोपी को जमानत दे दी थी। इसके खिलाफ दिल्ली पुलिस और पीड़ित बच्ची की मां ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए आरोपी की जमानत रद्द कर दी और निर्धारित समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश जारी किया।

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 3 साल की बच्ची मामले में आरोपी की जमानत रद्द

स्कूल में दूसरे दिन हुई थी कथित घटना

पुलिस शिकायत के अनुसार, घटना 30 अप्रैल की है। पीड़ित बच्ची की मां ने आरोप लगाया कि स्कूल में दाखिले के दूसरे ही दिन स्कूल परिसर के भीतर बच्ची के साथ कथित यौन उत्पीड़न हुआ। शिकायत के आधार पर जनकपुरी थाने में मामला दर्ज किया गया। आरोपी उसी निजी स्कूल में कार्यरत 57 वर्षीय कर्मचारी बताया गया है।

पुलिस ने तुरंत की थी कार्रवाई

एफआईआर दर्ज होने के बाद दिल्ली पुलिस ने 1 मई को आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। बाद में ट्रायल कोर्ट से उसे जमानत मिल गई थी। अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद आरोपी को फिर से न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा और निर्धारित समय के भीतर अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।

अब POCSO कोर्ट में चलेगी सुनवाई

हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की आगे की कानूनी कार्यवाही संबंधित POCSO कोर्ट में होगी। अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और तर्क प्रस्तुत करेंगे, जिसके आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठा सवाल

इस घटना ने एक बार फिर स्कूल परिसरों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में कर्मचारियों का उचित सत्यापन, निगरानी व्यवस्था और बाल सुरक्षा संबंधी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments