उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बीजेपी ने अपने विधायकों की जमीनी पकड़ पर बड़ा आंतरिक आकलन किया है। सूत्रों के मुताबिक, 403 सीटों पर हुए फीडबैक में करीब 125 से 128 मौजूदा विधायकों की स्थिति कमजोर बताई गई है। अब टिकट को लेकर पार्टी में मंथन तेज है।
403 सीटों पर पार्टी ने कराया आंतरिक आकलन
2024 के लोकसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद बीजेपी ने यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी तेज कर दी है। पार्टी संगठन और मौजूदा विधायकों की जमीनी स्थिति को लेकर लगातार फीडबैक जुटा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर इंटरनल फीडबैक और सर्वे के जरिए विधायकों की स्थिति का आकलन किया गया है। रिपोर्ट में करीब 125 से 128 मौजूदा विधायकों की स्थिति कमजोर बताई गई है। हालांकि, टिकट को लेकर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व और चुनाव के समय उपलब्ध ताजा ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर होगा।
कार्यकर्ताओं से दूरी बनी बड़ी वजह
सर्वे में विधायकों की लोकप्रियता के साथ-साथ आम जनता और स्थानीय संगठन के कार्यकर्ताओं की राय को भी महत्व दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कई विधायकों को लेकर कार्यकर्ताओं से दूरी की शिकायत सामने आई है।

कुछ विधायकों पर आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद उन्होंने स्थानीय कार्यकर्ताओं को अपेक्षित महत्व नहीं दिया। थाने, तहसील और ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ताओं के काम नहीं होने की शिकायतों को भी फीडबैक में शामिल किया गया है।
सड़क, बिजली और विकास के मुद्दे भी भारी
स्थानीय समस्याओं को लेकर जनता की नाराजगी भी कई क्षेत्रों में सामने आने की बात कही जा रही है। सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाएं और विकास कार्यों को लेकर असंतोष की जानकारी पार्टी तक पहुंची है।
कुछ क्षेत्रों में छुट्टा पशु और बिजली मीटरिंग जैसे स्थानीय मुद्दों को भी विधायकों की स्थिति के आकलन में महत्वपूर्ण माना गया है। यानी बीजेपी अब केवल चुनावी प्रदर्शन नहीं, बल्कि रोजमर्रा के स्थानीय मुद्दों पर विधायक की पकड़ को भी कसौटी बना रही है।
व्यवहार और विवादों पर भी नजर
सूत्रों के अनुसार, कुछ विधायकों और उनके करीबियों के व्यवहार को लेकर भी कार्यकर्ताओं तथा जनता में नाराजगी की बात सामने आई है। स्थानीय प्रशासन के साथ तालमेल और ठेके-पट्टों से जुड़े सवाल भी पार्टी के लिए चिंता का विषय बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा कुछ विधायकों को लेकर यह फीडबैक भी मिला है कि 2017 और 2022 में जीत के बाद उनका जनता से सीधा संपर्क कमजोर हुआ है।
सिर्फ मोदी-योगी के नाम पर निर्भर नहीं रहना चाहती BJP
पार्टी के आंतरिक आकलन में एक अहम बात यह भी सामने आई है कि केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता के सहारे स्थानीय चुनावी चुनौती से निपटना पर्याप्त नहीं माना जा रहा।
बीजेपी अब स्थानीय उम्मीदवार की स्वीकार्यता और क्षेत्र में उसकी सक्रियता को भी महत्वपूर्ण मान रही है। यही वजह है कि कमजोर विधायकों की जगह नए चेहरों को मौका देने की रणनीति पर चर्चा चल रही है।
विनोद तावड़े के दौरे से मिला संगठन पर फोकस का संदेश
बीजेपी के नए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े की यूपी में सक्रियता को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। लखनऊ के शुरुआती दौरे में उन्होंने संगठन को जमीन पर मजबूत करने और नेताओं-कार्यकर्ताओं को वीआईपी संस्कृति से दूर रहने का संदेश दिया।
स्वागत के लिए बड़े-बड़े होर्डिंग और बैनर लगाने की परंपरा से दूरी बनाने का संकेत भी संगठनात्मक बदलाव की दिशा में देखा गया। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की रणनीति में समन्वय, कार्यकर्ता, जातीय समीकरण और उम्मीदवार चयन को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
टिकट के लिए अब किन बातों पर जोर?
बीजेपी में सबसे ज्यादा चर्चा उम्मीदवार चयन को लेकर है। सूत्रों के मुताबिक, टिकट तय करते समय संगठन में पकड़, जनता के बीच स्वीकार्यता, स्थानीय सामाजिक समीकरण और चुनाव जीतने की संभावना को प्राथमिकता दी जा सकती है।
इसका मतलब साफ है कि मौजूदा विधायक होना अब टिकट की गारंटी नहीं माना जाएगा। पार्टी कुछ सीटों पर नए चेहरों को उतारने के विकल्प पर भी विचार कर सकती है। गुजरात और मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर चेहरे बदलने के प्रयोग का उदाहरण भी पार्टी के भीतर चर्चा में है।
NDA सहयोगियों की सीटों पर भी नजर
सूत्रों के मुताबिक, आंतरिक फीडबैक केवल बीजेपी विधायकों तक सीमित नहीं है। एनडीए के सहयोगी दलों की कुछ सीटों पर भी संगठनात्मक स्थिति का आकलन किए जाने की चर्चा है।
अपना दल (एस), निषाद पार्टी और सुभासपा के कुछ विधायकों की सीटों को लेकर भी फीडबैक लिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, सहयोगी दलों की सीटों पर उम्मीदवार या चुनाव चिह्न से जुड़ा कोई भी अंतिम फैसला गठबंधन की बातचीत के बाद ही होगा।
छह क्षेत्रों में क्या तस्वीर सामने आई?
बीजेपी ने संगठनात्मक रूप से यूपी को छह क्षेत्रों में बांट रखा है। सूत्रों के मुताबिक, अलग-अलग क्षेत्रों में भी कई मौजूदा विधायकों की स्थिति कमजोर बताई गई है।
- पश्चिम क्षेत्र: 71 सीटें, करीब 23-25 सीटों पर बदलाव के आसार
- ब्रज क्षेत्र: 65 सीटें, करीब 24-26 सीटों पर चेहरे कमजोर
- अवध क्षेत्र: 82 सीटें, करीब 26-28 सीटों पर बदलाव की चर्चा
- कानपुर क्षेत्र: 52 सीटें, करीब 22-24 सीटों पर स्थिति कमजोर
- काशी क्षेत्र: 72 सीटें, करीब 19-21 सीटों पर बदलाव की संभावना
- गोरखपुर क्षेत्र: 62 सीटें, करीब 18-22 सीटों पर नए चेहरे की जरूरत
2027 में टिकट कटने का बड़ा पैमाना?
अगर इंटरनल सर्वे में सामने आए आंकड़े पार्टी के अंतिम आकलन में भी कायम रहते हैं तो 125 से ज्यादा मौजूदा विधायकों के टिकट पर बदलाव की संभावना बन सकती है। हालांकि, चुनाव में अभी समय है और अंतिम निर्णय तक कई समीकरण बदल सकते हैं।
2027 में सत्ता बरकरार रखना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती होगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष के PDA समीकरण के प्रभाव के बाद पार्टी अब विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार चयन से लेकर बूथ स्तर तक किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। ऐसे में इस बार टिकट का सबसे बड़ा पैमाना विधायक की जमीनी पकड़ और जीतने की क्षमता बन सकती है।

