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Wednesday, September 2, 2026
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मजीठा में गरजे भगवंत मान, बादल-मजीठिया पर हमला; बोले- अब डर की राजनीति नहीं चलेगी

मजीठा की जनसभा में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विकास कार्यों का लेखा-जोखा जनता के सामने रखा और अकाली राजनीति पर तीखे प्रहार किए। मुफ्त बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब में अब पुरानी डर और दबदबे वाली राजनीति की जगह विकास को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

चाविंदा देवी में जुटी बड़ी भीड़

अमृतसर के मजीठा विधानसभा क्षेत्र के ऐतिहासिक गांव चाविंदा देवी में बुधवार को भगवंत मान की पहली जनसभा हुई। बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री को सुनने पहुंचे। मान ने कहा कि सरकार ने पिछले साढ़े चार वर्षों में मुफ्त बिजली, बेहतर सड़कें, आधुनिक अस्पताल, शिक्षा संस्थानों और खेल सुविधाओं के क्षेत्र में काम किया है। उनके मुताबिक, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना भी सरकार की प्राथमिकताओं में रहा है।

पुरानी राजनीति पर सीधा हमला

मजीठा की राजनीति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पहले क्षेत्र में भय और दबदबे का माहौल था। उन्होंने कहा कि राजनीति झूठे पुलिस मामलों, आर्थिक शोषण और गुंडागर्दी के इर्द-गिर्द घूमती थी। मान ने बिना नाम लिए पुराने प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने अब राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।

मजीठा में गरजे भगवंत मान, बादल-मजीठिया पर हमला; बोले- अब डर की राजनीति नहीं चलेगी

बादल और मजीठिया पर तीखे आरोप

भगवंत मान ने सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने अकाली शासन के दौरान पंजाब में मादक पदार्थों के नेटवर्क को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इसका सबसे ज्यादा नुकसान प्रदेश के युवाओं और परिवारों को उठाना पड़ा। उन्होंने धार्मिक मुद्दों को राजनीति से जोड़ने पर भी अकाली नेतृत्व को घेरा।

विकास बनाम व्यक्तिगत राजनीति

मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि पंजाब की राजनीति को व्यक्तिगत स्वार्थों से निकालकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क और पेयजल जैसे मुद्दों पर केंद्रित किया जाए। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी सरकार ने चुनावी वादों के अलावा भी कई जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीन पर उतारा है।

मजीठा से आगे की सियासी तस्वीर

जनसभा में भगवंत मान के राजनीतिक हमलों ने पंजाब की सियासत में गर्मी बढ़ा दी। एक तरफ उन्होंने अपनी सरकार के कामकाज को जनता के सामने रखा, वहीं दूसरी ओर अकाली नेतृत्व को पुराने दौर की राजनीति से जोड़ने की कोशिश की। अब इस हमले का जवाब सुखबीर बादल और बिक्रम मजीठिया किस अंदाज में देते हैं, यह आने वाले दिनों में पंजाब की सियासत के लिए अहम होगा।

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