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Thursday, October 15, 2026
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बागपत के नए DM दिव्यांशु पटेल का विजन साफ, नवाचार और जनभागीदारी पर होगा जोर

बागपत के नवनियुक्त जिलाधिकारी दिव्यांशु पटेल ने बुधवार को कलक्ट्रेट पहुंचकर जिले के 32वें जिलाधिकारी के रूप में कार्यभार संभाल लिया। इससे पहले वह मुरादाबाद नगर निगम के नगर आयुक्त के पद पर तैनात थे। बागपत उनके लिए जिलाधिकारी के तौर पर पहला जिला है।

शासन के हालिया तबादला आदेश में मुरादाबाद के नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल को बागपत का डीएम बनाया गया था। वहीं, तत्कालीन डीएम अस्मिता लाल को शासन में पिछड़ा वर्ग कल्याण से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

‘सीधी और स्पष्ट बात करना पसंद है’

कार्यभार संभालने के बाद दिव्यांशु पटेल ने अपनी कार्यशैली को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें इधर-उधर की बातों के बजाय सीधी और स्पष्ट बात करना पसंद है।

उनके मुताबिक, प्रशासन का उद्देश्य सिर्फ फाइलों में विकास दिखाना नहीं होना चाहिए। विकास ऐसा होना चाहिए जिससे आम नागरिक का जीवन अधिक सहज, सुविधाजनक और आधुनिक बने।

बागपत की दिल्ली-NCR से नजदीकी को भी वह जिले के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखते हैं।

तीन स्तंभों पर होगी कार्ययोजना

दिव्यांशु पटेल ने अपनी कार्ययोजना के तीन प्रमुख स्तंभ बताए हैं—नवाचार, जनसहभागिता और सतत विकास।

उनका कहना है कि प्रशासनिक कामकाज में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, खतौनी और शिकायतों जैसी सेवाओं के लिए लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रक्रियाओं को तकनीक से जोड़ने पर जोर रहेगा।

उनका फोकस सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक सरल और नागरिक-केंद्रित बनाने पर रहेगा।

बागपत के नए DM दिव्यांशु पटेल का विजन साफ, नवाचार और जनभागीदारी पर होगा जोर

विकास में जनता की भागीदारी पर जोर

नए डीएम के मुताबिक कोई भी विकास कार्य तब तक स्थायी नहीं हो सकता, जब तक उसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी न हो।

गांवों की सफाई, तालाबों का जीर्णोद्धार और स्थानीय स्तर के दूसरे विकास कार्यों में जनता को भागीदार बनाने की योजना है। उनका मानना है कि प्रशासन और नागरिक मिलकर काम करेंगे तो योजनाओं का असर अधिक टिकाऊ होगा।

यह दृष्टिकोण बागपत जैसे कृषि प्रधान जिले में स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

दिल्ली-NCR की नजदीकी को अवसर में बदलने की तैयारी

बागपत की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए नए जिलाधिकारी रोजगार और छोटे उद्योगों के विस्तार पर भी जोर देना चाहते हैं।

उनके अनुसार दिल्ली के करीब होने का लाभ बागपत को मिलना चाहिए। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

इसके साथ जिले को साफ-सुथरा और सुंदर बनाने तथा अलग-अलग वर्गों के बीच समन्वय और सद्भाव बनाए रखने को भी प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात

दिव्यांशु पटेल ने प्रशासन में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया है। साथ ही शासन की प्राथमिकताओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की बात कही है।

उनके सामने एक तरफ सरकारी योजनाओं को पात्र लोगों तक पहुंचाने की चुनौती होगी, तो दूसरी तरफ बागपत में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने की जिम्मेदारी भी होगी।

कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने अधिकारियों के साथ प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर आगे की प्राथमिकताओं पर भी जोर दिया।

मुरादाबाद में सफाई और राजस्व पर रहा फोकस

बागपत आने से पहले दिव्यांशु पटेल जनवरी 2024 से मुरादाबाद नगर निगम के नगर आयुक्त थे। वहां उनके कार्यकाल के दौरान संविधान पार्क, वार म्यूजियम, भारतीय खेलो इंडिया पार्क, श्रीराम वाटिका और हनुमान वाटिका जैसे प्रोजेक्ट चर्चा में रहे।

उनकी कार्यशैली में शहर की सफाई और सार्वजनिक स्थानों के निरीक्षण पर भी जोर रहा। स्थानीय रिपोर्टों में उन्हें सुबह जल्दी सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करने वाले अधिकारी के तौर पर भी उल्लेखित किया गया है।

अब यही प्रशासनिक अनुभव बागपत में किस तरह लागू होता है, इस पर जिले की जनता और प्रशासनिक तंत्र की नजर रहेगी।

शिक्षा और प्रशासनिक अनुभव

दिव्यांशु पटेल मूल रूप से अंबेडकरनगर के रहने वाले हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की तथा जेएनयू से पीएचडी भी की। UPSC में उनकी रैंक 204 बताई गई है।

उन्होंने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट बाराबंकी, मुख्य विकास अधिकारी उन्नाव और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में विशेष सचिव/अपर आयुक्त जैसे पदों पर भी काम किया है।

बागपत के नए जिलाधिकारी दिव्यांशु पटेल ने अपनी प्राथमिकताओं को तीन शब्दों—नवाचार, जनसहभागिता और सतत विकास—में स्पष्ट किया है। अब चुनौती इन प्राथमिकताओं को जमीन पर लागू करने की होगी। दिल्ली-NCR की नजदीकी, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और रोजगार की जरूरतों को देखते हुए उनका प्रशासनिक एजेंडा आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण रहेगा।

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