जिले के चर्चित मड़वा पहाड़ प्रकरण में पुलिस कार्रवाई और कथित एनकाउंटर को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने सवाल उठाए हैं। गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में परिषद के प्रांत एसएफडी सह संयोजक अभिनय दुबे ने पुलिस की कार्रवाई, घटनास्थल की सुरक्षा, साक्ष्य जुटाने और आरोपितों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
एबीवीपी ने मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग की है।
हथियार बरामदगी और घटनास्थल को लेकर सवाल
अभिनय दुबे ने कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई के दौरान वास्तव में एनकाउंटर हुआ था, तो घटनास्थल से हथियार की आधिकारिक बरामदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जब एसआईटी और सीआईडी जैसी एजेंसियां जांच से जुड़ी हैं, तो गोलीबारी वाले स्थान की विधिवत घेराबंदी और बैरिकेडिंग क्यों नहीं की गई।
एबीवीपी नेता ने दावा किया कि घटनास्थल पर खून के निशान भी दिखाई नहीं दिए। हालांकि, ये संगठन की ओर से उठाए गए सवाल और दावे हैं। इनकी पुष्टि या खंडन जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से ही हो सकेगा।
हरेराम यादव की चोट पर भी सवाल
प्रेस वार्ता में दूसरे आरोपित हरेराम यादव की कथित चोट को लेकर भी सवाल उठाए गए। अभिनय दुबे ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों में उसके पैर में चोट या गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी।
एबीवीपी ने पुलिस के उस कथन पर सवाल उठाया कि आरोपित भागने के दौरान घायल हुआ था। संगठन ने पूछा कि यदि वह गंभीर रूप से घायल था तो अगले दिन अदालत में पेशी के दौरान उसकी स्थिति कैसी थी।
इसके अलावा गिरफ्तारी की तारीख और समय को लेकर भी कथित विरोधाभासों को स्पष्ट करने की मांग की गई।

गनौरी यादव और पुराने मामलों का मुद्दा
एबीवीपी ने मुख्य आरोपित नंदन यादव के पिता गनौरी यादव का भी उल्लेख किया। संगठन की ओर से दावा किया गया कि उनके खिलाफ करीब दो दशक पहले से गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आती रही है।
अभिनय दुबे ने सवाल उठाया कि यदि ऐसा था तो पुलिस की कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में कथित अवैध बालू और शराब कारोबार को लेकर भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है और संबंधित जांच एजेंसियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
पीड़िता पर सोशल मीडिया टिप्पणियों की निंदा
प्रेस वार्ता में एबीवीपी नेताओं ने पीड़िता को लेकर सोशल मीडिया पर की जा रही टिप्पणियों की भी निंदा की। संगठन ने कहा कि किसी महिला के घर से बाहर निकलने का समय उसकी सुरक्षा या चरित्र का आधार नहीं बनाया जा सकता।
परिषद ने पीड़िता की पहचान और तस्वीरें सोशल मीडिया पर कथित रूप से प्रसारित किए जाने की भी शिकायत की। संगठन ने ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना कानून और उसकी निजता से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की जिम्मेदारी तय करना भी जांच का हिस्सा हो सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर 24 घंटे का अल्टीमेटम
एबीवीपी नेताओं ने बताया कि 22 सितंबर को जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की गई थी।
संगठन का दावा है कि ज्ञापन के बाद 48 घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद अपेक्षित स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव दिखाई नहीं दिया।
अब परिषद ने प्रशासन को अगले 24 घंटे का समय देते हुए सुरक्षा व्यवस्था और जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
आंदोलन की चेतावनी
एबीवीपी ने कहा कि यदि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई और जांच में पारदर्शिता नहीं दिखाई दी तो संगठन शहर की सड़कों से लेकर सदन तक आंदोलन करेगा।
प्रेस वार्ता में प्रांत कार्यकारिणी सदस्य शांतनु कुमार, नगर सह मंत्री सुमित कुमार, विभाग प्रमुख राजीव रंजन समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मड़वा पहाड़ प्रकरण में अब पुलिस कार्रवाई को लेकर एबीवीपी की ओर से कई सवाल सामने आए हैं। हथियार बरामदगी, घटनास्थल की सुरक्षा, आरोपितों की चोट और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब जांच के आधिकारिक निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगा। फिलहाल संगठन ने मामले में स्वतंत्र, उच्चस्तरीय और पारदर्शी जांच की मांग तेज कर दी है।

