मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड में मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मथुरा जिला जेल का करीब 155 साल पुराना महिला फांसीघर फिर चर्चा में है। हालांकि, मुस्कान को यहां फांसी दिए जाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
ब्रिटिश शासन में बना था महिला फांसीघर
मथुरा जिला जेल में महिलाओं को फांसी देने के लिए अलग फांसीघर बनाया गया है। यह जेल की सामान्य बैरकों से अलग और अपेक्षाकृत एकांत स्थान पर स्थित है। इसकी सुरक्षा के लिए चारों ओर ऊंची दीवारें बनाई गई हैं।
बताया जाता है कि इस फांसीघर का निर्माण ब्रिटिश शासन के दौरान करीब 155 वर्ष पहले हुआ था। आजादी के बाद यहां किसी महिला को फांसी दिए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि जब भी किसी महिला कैदी को मौत की सजा मिलती है, मथुरा जेल का यह फांसीघर चर्चा में आ जाता है।
शबनम मामले में भी सुर्खियों में आया था
मथुरा जेल का महिला फांसीघर इससे पहले अमरोहा की शबनम के मामले में चर्चा में आया था। शबनम को अपने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी।
उसकी दया याचिका खारिज होने के बाद मथुरा जेल के फांसीघर को दुरुस्त भी कराया गया था। उस समय आशंका जताई जा रही थी कि शबनम को यहीं फांसी दी जा सकती है। हालांकि, उसे अब तक फांसी नहीं दी गई है और वह रामपुर जेल में बंद है।
फांसी की रस्सी बक्सर जेल में तैयार होती है
भारत में फांसी की रस्सी तैयार करने के लिए बिहार की बक्सर जेल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, यहां विशेष प्रकार के कॉटन से फांसी की रस्सी तैयार की जाती है।

ब्रिटिश काल से चली आ रही इस व्यवस्था में रस्सी की मजबूती और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है। मौत की सजा से जुड़े मामलों में बक्सर की इस व्यवस्था का अक्सर उल्लेख होता है।
मौत की सजा के बाद तुरंत नहीं होती फांसी
अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को तुरंत फांसी नहीं दी जाती। भारतीय कानून में इसके लिए कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं।
मौत की सजा की संबंधित हाई कोर्ट से पुष्टि जरूरी होती है। इसके बाद दोषी को उपलब्ध अपील और अन्य कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने का अधिकार रहता है। दया याचिका की प्रक्रिया भी इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है।
सभी कानूनी विकल्प समाप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत अदालत से डेथ वारंट या ब्लैक वारंट जारी किया जाता है। इसके बाद ही जेल प्रशासन फांसी की तारीख और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर आगे की कार्रवाई करता है।
मुस्कान को मथुरा जेल में फांसी दिए जाने की अभी पुष्टि नहीं
मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मथुरा जेल के फांसीघर को लेकर चर्चाएं जरूर तेज हुई हैं, लेकिन अभी यह कहना सही नहीं होगा कि मुस्कान को यहीं फांसी दी जाएगी।
मथुरा जिला जेल प्रशासन के मुताबिक, मुस्कान को फांसी दिए जाने से संबंधित कोई आधिकारिक सूचना अभी जेल प्रशासन को नहीं मिली है। इसलिए फिलहाल 155 साल पुराने इस फांसीघर की चर्चा केवल संभावनाओं तक सीमित है।

