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Tuesday, October 27, 2026
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यूपी से दिल्ली तक SIR पर उठे सवाल खरगे ने मोदी शाह और चुनाव आयोग को घेरा

देश में SIR यानी मतदाता सूची की जांच और सुधार को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 13 राज्यों से जुड़े आंकड़े सामने रखकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम हटाने और जोड़ने के दौरान कई जगह गड़बड़ियां सामने आई हैं। साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।

खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जैसे जैसे चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं वैसे वैसे विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर 1 नवंबर को प्रस्तावित विपक्ष की रैली को दबाने का आरोप भी लगाया। खरगे ने कहा कि इंडिया गठबंधन हर नागरिक के वोट और संविधान की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

कांग्रेस अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र पश्चिम बंगाल राजस्थान गुजरात कर्नाटक आंध्र प्रदेश ओडिशा तेलंगाना झारखंड हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों के आंकड़ों का जिक्र किया। उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में फॉर्म 8 में बदलाव से जुड़े 10470 मामलों को लेकर एफआईआर दर्ज हुई और राज्य स्तर पर जांच शुरू की गई। महाराष्ट्र में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.07 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया गया है।

गुजरात में SIR के बाद मतदाता सूची में 68.12 लाख नाम कम होने की बात कही गई है। तेलंगाना में ड्राफ्ट सूची से 73.39 लाख नाम हटने का दावा सामने आया है। वहीं दिल्ली में 47.5 लाख नाम हटाए जाने का आंकड़ा दिया गया। राजस्थान में चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग की सूचियों के बीच करीब 30 लाख अंतर होने की बात भी उठाई गई।

कर्नाटक में अधिकारियों की ओर से 61059 लोगों के नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 भरे जाने पर सवाल उठाए गए। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भी नाम हटाने से जुड़े आवेदनों को लेकर आपत्तियां जताई गईं। हरियाणा में 44.91 लाख सत्यापन नोटिस जारी होने और 1 अक्टूबर तक 4.35 लाख सुनवाई लंबित रहने का दावा किया गया।

इन आंकड़ों के जरिए कांग्रेस ने मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है। हालांकि इन आरोपों और आंकड़ों पर चुनाव आयोग का पक्ष सामने आना जरूरी है। अब देखना होगा कि आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है और मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों पर क्या कार्रवाई होती है।

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