इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिकारियों के लिए 845 नए सरकारी आवास बनाए जाएंगे। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन मकानों के निर्माण पर करीब 543 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है। इससे हाई कोर्ट के प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के लिए रहने की नई व्यवस्था तैयार होगी।
मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। बैठक के बाद प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिकारियों के लिए अलग अलग श्रेणी के कुल 845 सरकारी आवास बनाए जाएंगे।
इस योजना के तहत टाइप तीन के 533 आवास और टाइप चार के 312 आवास तैयार किए जाएंगे। दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 845 मकान बनेंगे। सरकार ने इसके लिए करीब 543 करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक की लागत का अनुमान लगाया है। निर्माण का काम तय मानकों के हिसाब से कराया जाएगा।
इन नए आवासों का निर्माण प्रयागराज के देवघाट झलवा इलाके में किया जाएगा। इसके लिए 10.37 एकड़ जमीन तय की गई है। इसी जमीन पर पूरी योजना को तैयार किया जाएगा। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद अब इस परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट उत्तर प्रदेश की न्याय व्यवस्था का एक अहम हिस्सा है। यहां बड़ी संख्या में न्यायिक कामकाज होता है और अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी काफी अहम होती हैं। ऐसे में उनके लिए सरकारी आवास की व्यवस्था करना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिकारियों के लिए बनने वाले इन मकानों से सरकारी आवास की सुविधा बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि निर्माण कब शुरू होगा और इसे पूरा करने की समय सीमा क्या होगी इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। फिलहाल कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस परियोजना पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

