उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे पर अभी से चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच रामगोपाल यादव के फॉर्मूले ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। अगर 2022 के विधानसभा चुनाव में मिले वोटों को आधार बनाकर सीटों का बंटवारा होता है तो कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ 6 सीटें आ सकती हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस की मांग 170 से ज्यादा सीटों की बताई जा रही है।
दरअसल फिरोजाबाद में सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव से कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने 1992 में सपा और बसपा के बीच हुए समझौते का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उस समय कांशीराम के साथ महज 15 मिनट में 425 सीटों का बंटवारा हो गया था। उस समझौते का आधार साफ था कि पिछले चुनाव में जिस पार्टी को जिस सीट पर ज्यादा वोट मिले थे वह सीट उसी पार्टी को दी जाएगी।
रामगोपाल यादव ने अपनी राय रखते हुए कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस अलग अलग चुनाव लड़ी थीं। ऐसे में जिस विधानसभा सीट पर जिस पार्टी को ज्यादा वोट मिले थे उस सीट पर उसी पार्टी का दावा होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि सीटों का आखिरी फैसला अखिलेश यादव और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को ही करना है।
2022 के चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 403 में से 399 सीटों पर चुनाव लड़ा था। पार्टी को सिर्फ दो सीटों पर जीत मिली थी जबकि चार सीटों पर उसके उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे थे। रामपुर खास से आराधना मिश्रा मोना और फरेंदा से वीरेंद्र चौधरी चुनाव जीते थे। वहीं मथुरा खेरागढ़ जगदीशपुर और किदवईनगर में कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी। इसी आधार पर छह सीटों का आंकड़ा सामने आ रहा है।
हालांकि सपा और कांग्रेस के बीच असली बातचीत में यह फॉर्मूला कितना काम आएगा यह अभी तय नहीं है। 2022 में सपा के साथ राष्ट्रीय लोकदल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भी थीं। इन दोनों दलों ने क्रमशः 33 और 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था। अब ये पार्टियां सपा के साथ नहीं हैं। ऐसे में चर्चा है कि उनकी पुरानी सीटों को जोड़कर कांग्रेस को 50 से 60 सीटें दी जा सकती हैं।
गौर करने वाली बात यह भी है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने कांग्रेस को 17 सीटें दी थीं। ऐसे में विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा केवल पुराने वोटों के आधार पर होगा या राजनीतिक समीकरण भी देखे जाएंगे इस पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल दोनों दलों के बीच अंतिम समझौते का इंतजार है।

