ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से तारिक रहमान की दूरी पर शेख हसीना ने सवाल उठाते हुए भारत के साथ रिश्तों को लेकर बांग्लादेश की मौजूदा सरकार की नीति पर निशाना साधा है। उनके बयान से दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक तनाव एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
ब्रिक्स समिट से दूरी पर हसीना का सवाल
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दूरी बनाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर नई दिल्ली में उनकी मौजूदगी रहमान के सम्मेलन में शामिल नहीं होने की वजह थी, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
हसीना ने सवाल किया कि जब उनके पिता भारत आए थे, तो वह खुद भारत आने से क्यों बच रहे हैं। उनके इस बयान को भारत-बांग्लादेश संबंधों के मौजूदा तनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
बांग्लादेश ने बताई थी अलग वजह
तारिक रहमान ने भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया था। ढाका की ओर से कहा गया कि उन्हें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित किया गया था।
इसके अलावा 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में हुई बिम्सटेक के गृह मंत्रियों की पहली बैठक में बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद भी शामिल नहीं हुए। लगातार दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से दूरी ने भारत के साथ ढाका के रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग
बांग्लादेश की मौजूदा BNP नेतृत्व वाली सरकार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद हसीना भारत में रह रही हैं।
ढाका का आरोप है कि उनकी भारत में मौजूदगी दोनों देशों के संबंध सामान्य करने में बाधा बन रही है। वहीं हसीना ने दिसंबर 2026 तक बांग्लादेश लौटने की बात कही है, हालांकि उन्होंने अपने खिलाफ गिरफ्तारी और जेल की आशंका भी जताई है।
हसीना को सुनाई जा चुकी है मौत की सजा
नवंबर 2025 में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। मामला जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों से जुड़ा था।
हसीना ने इस फैसले को राजनीतिक कार्रवाई बताया है।
भारत दौरे से भी बनाई दूरी
प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान मलेशिया और चीन का दौरा कर चुके हैं, लेकिन अभी तक भारत की यात्रा नहीं की है। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन से उनकी अनुपस्थिति को लेकर शेख हसीना की टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के नेताओं के बयानों और राजनयिक गतिविधियों पर क्षेत्रीय राजनीति की नजर बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
तारिक रहमान सरकार की भारत नीति और शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित कर सकता है। ब्रिक्स सम्मेलन से दूरी और बिम्सटेक बैठक में बांग्लादेश की गैर-मौजूदगी के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि ढाका और नई दिल्ली के बीच संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

