बिहार के खगड़िया में स्कूल की जर्जर इमारत ने एक मासूम की जान ले ली। अमनी गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में सीढ़ी अचानक ढह गई और उसके मलबे की चपेट में बच्चे आ गए। हादसे के बाद प्रशासन हर स्कूल की सुरक्षा जांच कराने की बात कह रहा है।
अचानक भरभराकर गिरी सीढ़ी
खगड़िया के मानसी थाना क्षेत्र स्थित अमनी गांव के पासवान टोला के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में बुधवार को अचानक सीढ़ी ढह गई। हादसे के समय बच्चे स्कूल परिसर में थे। सीढ़ी का मलबा गिरने से कई बच्चे उसकी चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत और बचाव शुरू किया। घटना में नौ वर्षीय रितिका कुमारी की मौत हो गई, जबकि तीन बच्चे घायल बताए गए हैं।
अस्पताल पहुंचे घायल बच्चे
हादसे के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घायल बच्चों को इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। घटना के बाद परिवारों में चिंता और गुस्से का माहौल है।
जर्जर भवन को लेकर पहले से सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने स्कूल भवन की हालत को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सीढ़ी की स्थिति खराब थी और इसे लेकर पहले शिकायतें भी की गई थीं। हालांकि, इन शिकायतों और हादसे के बीच जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक जांच जरूरी है।
SDM ने क्या कहा?
सदर एसडीओ धनंजय कुमार ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि एक बच्ची की मौत हुई है और एक बच्चे का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है। अन्य बच्चों को भी हल्की चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के अनुसार सीढ़ी के जर्जर होने की शिकायतें पहले मिलती रही थीं। अधिकारियों ने दोषियों पर कार्रवाई और जिले के स्कूलों का ऑडिट कराने की बात कही है।

प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
खगड़िया में हाल के दिनों में स्कूलों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को लेकर कई चुनौतियां सामने आई हैं। सितंबर में बाढ़ के कारण जिले के कई स्कूलों में पढ़ाई भी प्रभावित हुई थी। ऐसे में अमनी की घटना स्कूल भवनों की नियमित जांच और समय पर मरम्मत की जरूरत को फिर सामने लाती है।
जांच बताएगी जिम्मेदारी किसकी
फिलहाल यह जांच का विषय है कि सीढ़ी आखिर किन परिस्थितियों में गिरी और क्या भवन की खराब स्थिति की पहले से जानकारी थी। जांच में शिकायतों, भवन की तकनीकी स्थिति और रखरखाव से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
एक बच्ची की मौत सिर्फ एक हादसे की खबर नहीं है, बल्कि यह सवाल भी है कि जिन इमारतों में बच्चे हर दिन सुरक्षित भविष्य की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कितनी गंभीरता से निभाई जा रही है। अब प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।

