उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों में निवेश और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ी हैं। सरकारी नीतियों और नए प्रोजेक्ट्स के जरिए राज्य अपने बड़े युवा कार्यबल को तकनीकी कौशल, रोजगार और उभरते उद्योगों से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
युवा आबादी को तकनीक से जोड़ने पर जोर
उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी और युवा कार्यबल को राज्य की प्रमुख आर्थिक ताकतों में गिना जाता है। सरकार की नीतियों में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, स्टार्टअप और उभरती तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
AI, ब्लॉकचेन और 5G जैसी तकनीकों से जुड़े प्रशिक्षण और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए युवाओं को नई तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार ने उत्तर प्रदेश को डीप-टेक और उभरती तकनीकों का प्रमुख केंद्र बनाने का लक्ष्य भी रखा है।
डेटा सेंटर से मजबूत हो रहा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ डेटा सेंटर की मांग भी बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश ने डेटा सेंटर के लिए अलग नीति और प्रोत्साहन व्यवस्था विकसित की है। अगस्त 2026 में राज्य की नई Data Centre Policy 2026 अधिसूचित की गई, जिसमें डेटा सेंटर पार्क, AI कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन डेटा सेंटर के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान है।
Invest UP के अनुसार, राज्य में आठ डेटा सेंटर पार्क विकसित करने और करीब 900 MW क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान बताया गया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में यूपी की भूमिका
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में नोएडा और ग्रेटर नोएडा महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरे हैं। Invest UP के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 230 से अधिक ESDM कंपनियां संचालन में हैं और देश की मोबाइल कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों का करीब 55 प्रतिशत राज्य में मौजूद है।
हालांकि, मोबाइल फोन उत्पादन से जुड़े सरकारी आंकड़ों में अलग-अलग समय पर अलग हिस्सेदारी बताई गई है। सितंबर 2026 के Invest UP डेटा में उत्तर प्रदेश से देश के मोबाइल निर्माण का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा बताया गया है, जबकि 2024 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 55 प्रतिशत का आंकड़ा बताया था। इसलिए इसे समय-विशिष्ट सरकारी आंकड़े के रूप में देखना जरूरी है।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स निर्माण को बढ़ावा देने के लिए राज्य की Electronics Component Manufacturing Policy 2025 में पूंजी सब्सिडी, भूमि सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहनों का प्रावधान है। इस नीति का पहला संशोधन सितंबर 2026 में अपडेट किया गया है।
सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ा निवेश
सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर भी उत्तर प्रदेश ने अपनी नीति तैयार की है। उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2024 में निवेश आकर्षित करने के लिए अतिरिक्त कैपिटल सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, भूमि संबंधी प्रोत्साहन और कौशल विकास जैसी सुविधाएं दी गई हैं।
Invest UP के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में HCL-Foxconn की सेमीकंडक्टर इकाई को मंजूरी मिली है। परियोजना का निवेश करीब 3,706 करोड़ रुपये बताया गया है और इसकी प्रस्तावित क्षमता 36 मिलियन यूनिट प्रति माह है।
रक्षा तकनीक और ब्रह्मोस परियोजना
तकनीकी और औद्योगिक विस्तार का असर रक्षा उत्पादन क्षेत्र में भी दिखाई देता है। लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस से जुड़ी परियोजना उत्तर प्रदेश के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का हिस्सा है।
राज्य में रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए अलग औद्योगिक नीतियां भी लागू हैं। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, कंपोनेंट निर्माण और रक्षा उत्पादन से जुड़े स्थानीय सप्लाई चेन को बढ़ावा देने की संभावना बनी है।
डिजिटल सेवाओं से सुशासन तक
तकनीकी विकास का एक दूसरा पहलू सरकारी सेवाओं का डिजिटल विस्तार है। IT और ITeS क्षेत्र के लिए उत्तर प्रदेश की नीति में निवेश, रोजगार, प्रशिक्षण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रोत्साहित करने के प्रावधान हैं।
यूपी के लिए चुनौती अब केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि इन परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं के लिए उच्च-कौशल वाले रोजगार, शोध और नवाचार के अवसर तैयार करना भी है।
उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और AI जैसे क्षेत्रों को लेकर नीतिगत और औद्योगिक गतिविधियां तेज हुई हैं। नोएडा-ग्रेटर नोएडा से लेकर यमुना एक्सप्रेसवे और लखनऊ तक तकनीकी इकोसिस्टम का विस्तार हो रहा है। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात से भी तय होगी कि वे कितने रोजगार, स्थानीय सप्लाई चेन, स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार पैदा करती हैं।

