निठारी कांड करीब दो दशक बाद एक बार फिर चर्चा में है। वजह है मामले में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में हुई मौत। कोली के खिलाफ 16 मामलों में मुकदमे चले, तीन में वह बरी हुआ और 13 में उसे मौत की सजा सुनाई गई। बाद में अदालतों में हुई सुनवाई के बाद सभी मामलों में उसकी दोषसिद्धियां खत्म हो गईं।
2006 में सामने आया था निठारी कांड
साल 2006 में नोएडा के निठारी इलाके में कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने के मामले सामने आए। बाद में सेक्टर-31 स्थित D-5 मकान के पीछे के इलाके से मानव अवशेष बरामद हुए। इस मामले में मकान में रहने वाले मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू कर्मचारी सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया।
जनवरी 2007 में जांच CBI को सौंप दी गई। CBI ने बाद में निठारी से जुड़े मामलों को अलग-अलग FIR और मुकदमों के रूप में आगे बढ़ाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, कोली के खिलाफ कुल 16 मामलों में ट्रायल चला।
16 मामलों में से 13 में मौत की सजा
अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, ट्रायल कोर्ट ने तीन मामलों में सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था। बाकी 13 मामलों में उसे दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई।
13 फरवरी 2009 को गाजियाबाद की अदालत ने निठारी से जुड़े एक मामले में कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद अन्य मामलों में भी कोली को मृत्युदंड मिलता गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2023 के फैसले में इन 16 मामलों का विस्तृत उल्लेख है।

2011 में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सजा बरकरार रखी
कोली के खिलाफ एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से दी गई दोषसिद्धि और मौत की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में बरकरार रखा। इसके बाद उसकी पुनर्विचार याचिका भी खारिज हुई।
2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति के समक्ष दाखिल दया याचिका भी खारिज कर दी गई। हालांकि, मौत की सजा पर अमल नहीं हो सका।
2015 में मौत की सजा बदली उम्रकैद में
29 जनवरी 2015 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दया याचिका के निपटारे में हुई लंबी देरी को ध्यान में रखते हुए उस मामले में कोली की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।
इसका मतलब यह था कि उस समय भी उसके खिलाफ बाकी मामलों की कानूनी प्रक्रिया जारी रही। बाद के वर्षों में अलग-अलग मामलों में उसकी दोषसिद्धियों को चुनौती दी गई।
2021 में 13वें मामले में भी बरी
26 मार्च 2021 को गाजियाबाद की अदालत ने कोली को 13वें मामले में भी बरी कर दिया। इसके बाद उसके खिलाफ मुख्य रूप से वही मामला बचा था जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने पहले उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा बरकरार रखी थी।
फिर 16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी हत्याकांड से जुड़े 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया। अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों और जांच की प्रक्रिया में गंभीर कमियां पाईं।
हाईकोर्ट ने किन सबूतों पर सवाल उठाए?
हाईकोर्ट के फैसले में अभियोजन की कहानी और सबूतों की विश्वसनीयता पर विस्तार से विचार किया गया। अदालत ने खास तौर पर कथित स्वीकारोक्ति और बरामदगी को लेकर सवाल उठाए।
एक अहम बिंदु यह था कि मानव अवशेष जिस खुली सर्विस लेन से बरामद हुए, वह केवल कोली के नियंत्रण में नहीं थी। इसलिए उस बरामदगी को केवल उसकी विशेष जानकारी के आधार पर हुई बरामदगी मानने में अदालत ने संदेह व्यक्त किया।
अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन की पूरी कहानी को पुष्ट करने वाला पर्याप्त स्वतंत्र फोरेंसिक साक्ष्य नहीं था।
2025 में सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतिम कानूनी राहत
हाईकोर्ट के 2023 के फैसले के खिलाफ CBI और पीड़ित परिवारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। 30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इन अपीलों को खारिज करते हुए 12 मामलों में कोली की बरी होने की स्थिति बरकरार रखी।
इसके बाद केवल वह मामला बचा था जिसमें 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखी थी।
11 नवंबर 2025 को आखिरी मामले में भी बरी
11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली की क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उस अंतिम मामले में भी उसकी दोषसिद्धि खत्म कर दी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि समान साक्ष्य के आधार पर बाकी मामलों में बरी किए जाने के बाद उसी evidentiary foundation पर एक मामले में दोषसिद्धि बनाए रखना उचित नहीं था।
इस फैसले के बाद कोली के खिलाफ निठारी मामलों में कोई दोषसिद्धि बाकी नहीं रही और सुप्रीम कोर्ट ने उसे रिहा करने का आदेश दिया।
अब हरिद्वार में हुई मौत
सभी मामलों में कानूनी रूप से बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली हरिद्वार में रह रहा था और चाय की दुकान चलाने की जानकारी सामने आई थी। अब उसकी मौत ने निठारी कांड की पूरी कानूनी कहानी को फिर चर्चा में ला दिया है।
मौत की परिस्थितियों की पुलिस जांच अलग विषय है। निठारी मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 2025 में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद कोली सभी संबंधित मामलों में बरी हो चुका था।
महत्वपूर्ण कानूनी टाइमलाइन
- 2006: निठारी मामले का खुलासा और गिरफ्तारी।
- 2007: CBI ने जांच संभाली और चार्जशीट दाखिल की।
- 2009: अलग-अलग मामलों में मौत की सजाएं शुरू हुईं।
- 2011: सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में दोषसिद्धि और मौत की सजा बरकरार रखी।
- 2015: लंबी देरी के आधार पर मौत की सजा उम्रकैद में बदली।
- 2021: 13वें मामले में भी बरी।
- 16 अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में बरी किया।
- 30 जुलाई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में बरी होने को बरकरार रखा।
- 11 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम मामले में भी बरी कर दिया।

