आम जनमत पार्टी को वित्तीय वर्ष 2023-24 में कथित 620 करोड़ रुपये का चंदा मिलने के मामले ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब बीजेपी नेता अनामिका पासवान सामने आई हैं और उन्होंने पार्टी, दस्तावेजों और चंदे से अपने संबंध को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
620 करोड़ रुपये के चंदे पर विवाद
आम जनमत पार्टी को वित्तीय वर्ष 2023-24 में कथित तौर पर 620 करोड़ रुपये का चंदा मिलने की चर्चा के बीच बिहार बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका पासवान ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने पूरे मामले से खुद को अलग करते हुए कहा कि उन्हें बेवजह बदनाम किया जा रहा है।
अनामिका का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2022 में ही आम जनमत पार्टी छोड़ दी थी। ऐसे में मौजूदा वित्तीय गतिविधियों से उनका कोई संबंध नहीं है।
2020 में बनाई थी पार्टी
अनामिका पासवान के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2020 में आम जनमत पार्टी की स्थापना की थी और वह इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष थीं। उस समय पार्टी बिहार में सक्रिय रूप से काम कर रही थी, लेकिन उन्होंने दावा किया कि पार्टी का बैंक अकाउंट तक नहीं खोला गया था।

इसके बाद चुनाव और कोविड महामारी का दौर आया। परिस्थितियां बदलती गईं और 2022 में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
पार्टी ट्रांसफर या भंग करने का सवाल
अनामिका ने एक दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा कि 26 जुलाई 2022 के कागज में उन्हें ‘पूर्व अध्यक्ष’ बताया गया है। उनका दावा है कि उन्होंने पार्टी किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर करने के लिए नहीं, बल्कि उसे भंग करने के उद्देश्य से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे।
यही दस्तावेज अब पूरे विवाद में उनके लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
सादे कागज पर हस्ताक्षर का आरोप
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि पार्टी से जुड़ी कागजी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने सादे कागजों पर हस्ताक्षर करके वकीलों को दिए थे। उनका दावा है कि बाद में उन्हीं हस्ताक्षरों का इस्तेमाल बार-बार किया गया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में सीए और वकीलों के जरिए होने वाली कागजी प्रक्रियाओं की उन्हें पूरी जानकारी नहीं थी। अनामिका ने यह भी बताया कि पार्टी से जुड़े लोग दलित और मध्यमवर्गीय समुदाय से आते थे।
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
अनामिका ने साफ कहा कि चुनाव, पार्टी की वेबसाइट और इनकम टैक्स से जुड़े मौजूदा मामलों में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कथित 620 करोड़ रुपये के चंदे से भी किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया।
उन्होंने मामले में कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है और सरकार से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
जांच से ही साफ होगी तस्वीर
यह विवाद अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है। पार्टी के दस्तावेज, हस्ताक्षर, वित्तीय रिकॉर्ड और आयकर से जुड़े कागजात इस पूरे मामले की असली तस्वीर सामने लाने में अहम हो सकते हैं।
अनामिका पासवान ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। अब निगाहें जांच पर हैं—क्योंकि इतने बड़े वित्तीय दावे में सवालों का जवाब राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि दस्तावेज और तथ्य ही दे सकते हैं।

