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Wednesday, September 16, 2026
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दुर्गा पूजा में मांसाहार पर धीरेंद्र शास्त्री की अपील से बंगाल में सियासी घमासान, कांग्रेस ने की पुलिस शिकायत

दुर्गा पूजा से पहले बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की मांसाहारी भोजन को लेकर की गई अपील ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने पुलिस शिकायत दर्ज कराई, जबकि बीजेपी और टीएमसी ने भी खान-पान पर टिप्पणी को लेकर सवाल उठाए हैं।

दुर्गा पूजा से पहले बयान पर विवाद

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। हावड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बंगाल के लोगों से नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान मांस और मछली का सेवन नहीं करने की अपील की।

उन्होंने यह भी कहा कि पूजा के दौरान प्रतिमाओं के आसपास नॉनवेज की बिक्री नहीं होनी चाहिए। बयान सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई।

कांग्रेस ने भवानीपुर थाने में दी शिकायत

दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप प्रसाद ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ भवानीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस का आरोप है कि उनकी टिप्पणी से बंगालियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

पार्टी ने प्रशासन से मामले में तत्काल कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह के बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं।

दुर्गा पूजा में मांसाहार पर धीरेंद्र शास्त्री की अपील से बंगाल में सियासी घमासान, कांग्रेस ने की पुलिस शिकायत

‘खान-पान पर निर्देश देने का अधिकार नहीं’

विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी ने भी धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी से दूरी बनाते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल में लोग क्या खाएं और क्या पहनें, इसका फैसला कोई बाहरी व्यक्ति या राजनीतिक दल नहीं कर सकता।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भोजन और पहनावे जैसे व्यक्तिगत मामलों में किसी को निर्देश देने का अधिकार नहीं है।

टीएमसी ने भी साधा निशाना

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भी धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बागेश्वर बाबा को बंगालियों के खान-पान पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।

सौगत रॉय ने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि वह स्वयं मांस खाते थे और उन्हें बंगाल के महान संतों में गिना जाता है। उनके मुताबिक, बंगाल की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा को बाहरी नजरिए से तय नहीं किया जा सकता।

बयान में लव-जिहाद का भी जिक्र

धीरेंद्र शास्त्री के बयान में केवल खान-पान की अपील नहीं थी। उन्होंने पश्चिम बंगाल को ‘लव-जिहाद मुक्त’ करने की अपील भी की। इसी हिस्से ने विवाद को और राजनीतिक रंग दे दिया।

कांग्रेस ने इसे सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला बयान बताया है, जबकि बीजेपी और टीएमसी की प्रतिक्रियाओं से साफ है कि मुद्दा अब केवल धार्मिक अपील तक सीमित नहीं रहा।

खान-पान से राजनीति तक पहुंचा विवाद

बंगाल में भोजन केवल व्यक्तिगत पसंद का विषय नहीं, बल्कि लंबे समय से संस्कृति और पहचान से भी जुड़ा रहा है। ऐसे में दुर्गा पूजा जैसे बड़े धार्मिक उत्सव के बीच मांसाहार को लेकर टिप्पणी का राजनीतिक असर होना स्वाभाविक है।

अब शिकायत के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर सबकी नजर है। फिलहाल इतना तय है कि दुर्गा पूजा से पहले शुरू हुआ यह विवाद बंगाल की सियासत में एक नया मुद्दा बन चुका है।

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