कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे नेपाल के छात्र इन दिनों किताबों से ज्यादा मोबाइल स्क्रीन पर नजरें टिकाए हैं। नेपाल में बाढ़ की हर नई तस्वीर उन्हें अपने घर और परिवार की याद दिला रही है। परिजन सुरक्षित हैं, फिर भी बिजली, सप्लाई और बढ़ते जलस्तर की खबरें चिंता बढ़ा रही हैं।
परिवार दूर, चिंता लगातार करीब
काठमांडू के भक्तपुर निवासी 24 वर्षीय सुयश पोखरेल कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में BPA थर्ड ईयर के छात्र हैं। इंटरनेशनल हॉस्टल में रहने वाले सुयश की 26 अगस्त की रात परिवार से बात हुई थी। उनके इलाके में हालात फिलहाल सामान्य बताए गए हैं, लेकिन नेपाल के दूसरे हिस्सों की तस्वीरें उन्हें परेशान कर रही हैं।
सुयश लगातार न्यूज अपडेट देख रहे हैं और कुछ अंतराल पर घर फोन कर परिवार का हाल जान रहे हैं।
पिता की बाढ़ प्रभावित इलाके में ड्यूटी
सुयश की चिंता की सबसे बड़ी वजह उनके पिता रोशन पोखरेल हैं। वह त्रिभुवन यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में क्लर्क हैं और उनकी ड्यूटी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लगाई गई है।
घर में मां सुषमा ब्यूटीशियन हैं और छोटा भाई शुभम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बीटेक कर रहा है। परिवार फोन पर सुरक्षित होने की बात कहता है, लेकिन पिता की ड्यूटी के कारण सुयश की बेचैनी कम नहीं हो रही।

बिजली और जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित
सुयश के मुताबिक, बाढ़ ने नेपाल के कई ट्रेड रूट प्रभावित किए हैं। इससे जरूरी सामान की आपूर्ति पर असर पड़ा है। बिजली की समस्या भी कई इलाकों में बनी हुई है।
उनका कहना है कि जब रोजमर्रा की जरूरतों की सप्लाई प्रभावित होने की खबर आती है, तो विदेश में बैठे छात्रों के लिए चिंता और बढ़ जाती है। वे चाहते हैं कि हालात जल्द सामान्य हों और राहत कार्य तेजी से आगे बढ़े।
त्रिशूली नदी ने बढ़ाई दुर्गेश की चिंता
नवलपरासी के 22 वर्षीय दुर्गेश गुप्ता भी कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में BTech कंप्यूटर साइंस के दूसरे वर्ष में पढ़ रहे हैं। उनके पिता गरिजेश प्रसाद गुप्ता शुगर मिल में फील्ड इंचार्ज हैं और मां बिंदु देवी घर पर हैं। छोटा भाई आशीष भी उनके साथ बीटेक कर रहा है।
दुर्गेश की चिंता खासतौर पर त्रिशूली नदी को लेकर है, जो उनके इलाके से होकर गुजरती है और आगे नारायणी नदी में मिलती है।
किताबें सामने, ध्यान मोबाइल पर
दुर्गेश बताते हैं कि परिवार से बात हुई है और घर पर सभी फिलहाल सुरक्षित हैं। फिर भी त्रिशूली का जलस्तर बढ़ने की खबरें उन्हें डरा रही हैं। करीब तीन साल पहले आई बाढ़ की तुलना में इस बार की तस्वीरें और खबरें ज्यादा चिंताजनक लग रही हैं।
कुरुक्षेत्र में बैठकर पढ़ाई कर रहे इन छात्रों के सामने भविष्य और करियर की किताबें जरूर खुली हैं, लेकिन मन बार-बार नेपाल लौट जाता है। दूरी ने उनकी चिंता कम नहीं की, बल्कि हर मोबाइल अपडेट को घर की खबर बना दिया है। ऐसे समय में परिवार की एक छोटी-सी सुरक्षित खबर भी उनके लिए सबसे बड़ी राहत बन जाती है।

