देश के कई शहरों में प्याज की कीमतें 55 से 60 रुपये किलो तक पहुंचने के बीच दिल्ली के उपभोक्ताओं को राहत देने की तैयारी है। सरकार बफर स्टॉक से प्याज निकालकर सस्ते दाम पर बेच रही है, ताकि त्योहारों से पहले रसोई का बजट ज्यादा न बिगड़े।
बढ़ती कीमतों के बीच सरकार का दखल
प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में कई जगह इसका भाव 55 से 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है। ऐसे में केंद्र सरकार ने दिल्ली में 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज उपलब्ध कराने की तैयारी की है। इसका उद्देश्य बढ़ती खुदरा कीमतों पर नियंत्रण रखना है।
नासिक से दिल्ली पहुंच रही खेप
सस्ती प्याज की आपूर्ति के लिए महाराष्ट्र के नासिक से प्याज दिल्ली लाई जा रही है। करीब 400 टन प्याज ट्रेन के जरिए राजधानी पहुंचाई जा रही है। शास्त्री भवन में NAFED के स्टॉल पर बिक्री की तैयारी पूरी हो चुकी है। मोबाइल वैन भी अलग-अलग इलाकों में उपभोक्ताओं तक प्याज पहुंचाएंगी।

NAFED और NCCF की बड़ी भूमिका
सरकार की योजना में NAFED और NCCF के साथ केंद्रीय भंडार भी शामिल हैं। दिल्ली में NCCF के 90 आउटलेट और 40 मोबाइल वैन तथा NAFED के 13 आउटलेट और 50 मोबाइल वैन के जरिए बिक्री की व्यवस्था की गई है। केंद्रीय भंडार के करीब 100 आउटलेट भी इस अभियान से जुड़ेंगे।
1.21 लाख टन का बफर स्टॉक
सरकार ने वर्ष 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक तैयार किया है। कीमतें बढ़ने पर इसी भंडार का इस्तेमाल बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। NCCF के पास करीब 62 हजार टन प्याज का स्टॉक बताया गया है, जिसमें से शुरुआती खेप दिल्ली लाई जा रही है।
मोबाइल वैन से घर के करीब राहत
सरकारी बिक्री का एक अहम हिस्सा मोबाइल वैन होंगी। शुरुआत में NCCF 15 मोबाइल वैन से बिक्री करेगा और जल्द इनकी संख्या 40 तक बढ़ाने की योजना है। NAFED की 50 मोबाइल वैन भी उपभोक्ताओं तक प्याज पहुंचाने में मदद करेंगी। इसके अलावा सफल और केंद्रीय भंडार के आउटलेट पर भी बिक्री होगी।
त्योहारों से पहले कीमतों पर नजर
त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी घरेलू बजट पर सीधा असर डाल सकती है। सरकार का बफर स्टॉक बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर इस दबाव को कम करने की कोशिश है। अब असली सवाल यह है कि 35 रुपये किलो की सरकारी प्याज कितने उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचती है और इसका बाजार भाव पर कितना असर पड़ता है।

