गोरखपुर जिला महिला अस्पताल में अत्याधुनिक AI मशीन शुरू होने से अब ब्लड और यूरिन की माइक्रोस्कोपिक जांच बेहद कम समय में हो सकेगी। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, नई तकनीक से मरीजों को तेज और मुफ्त जांच सुविधा मिलेगी, जबकि महंगी बाहरी पैथोलॉजी जांच से भी राहत मिलेगी।
डेढ़ मिनट में रिपोर्ट का दावा
गोरखपुर जिला महिला अस्पताल की पैथोलॉजी में नई AI आधारित सिक्टपल AI-100 मशीन स्थापित की गई है। SIC डॉ. अनिल झा के मुताबिक, मशीन से हीमोग्लोबिन, यूरिन और अन्य माइक्रोस्कोपिक जांचों की प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। सैंपल स्लाइड मशीन में डालने के करीब एक से डेढ़ मिनट के भीतर जांच का परिणाम पैथोलॉजिस्ट के फीड किए गए मोबाइल नंबर पर पहुंच सकता है।
एनीमिया से लेकर कैंसर सेल्स तक जांच
अस्पताल के अनुसार, मशीन से एनीमिया की अलग-अलग श्रेणियों की पहचान के साथ कैंसर सेल्स का पता लगाने वाली जांच भी की जा रही है। AI तकनीक सैंपल की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल इमेज तैयार करती है, जिससे पैथोलॉजिस्ट को माइक्रोस्कोप के जरिए लंबे समय तक स्लाइड देखने की जरूरत कम हो सकती है।
बाहर की जांच पर 500 से 3,000 रुपये तक खर्च
इस सुविधा का सबसे बड़ा फायदा मरीजों की जेब पर पड़ने वाला असर है। SIC के मुताबिक, ऐसी जांच के लिए बाहर की पैथोलॉजी में करीब 500 से 3,000 रुपये तक खर्च हो सकता है। जिला महिला अस्पताल में ये जांच मरीजों के लिए मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है।

दो दिन में 15 से 20 जांच
मशीन से जांच की शुरुआत बुधवार से हुई। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, शुरुआती दो दिनों में करीब 15 से 20 जांच की जा चुकी हैं। हर जांच का रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है और मशीन की लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
करीब 38 लाख रुपये की मशीन
अस्पताल में स्थापित इस अत्याधुनिक मशीन की लागत करीब 38 लाख रुपये बताई गई है। यह ऑटोमैटिक डिवाइस ब्लड और यूरिन की माइक्रोस्कोपिक जांच के लिए AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल करती है। इससे जांच प्रक्रिया में तेजी के साथ रिपोर्ट तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जल्द मिलेंगी 11 और मशीनें
डॉ. अनिल झा ने बताया कि फिलहाल मशीन को ट्रायल के तौर पर जिला महिला अस्पताल में लगाया गया है। अगर इसका रिस्पॉन्स बेहतर रहता है तो स्वास्थ्य विभाग को ऐसी 11 और मशीनें मिल सकती हैं, जिन्हें अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थापित किया जाएगा।
डीएम दीपक मीणा ने भी एमसीएच विंग स्थित पैथोलॉजी पहुंचकर मशीन की कार्यक्षमता और गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने ट्रेनर और प्रशिक्षण ले रहे पैथोलॉजिस्ट से मशीन के संचालन की जानकारी ली और तकनीक को अच्छी तरह समझने के निर्देश दिए।

