लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके राजनीतिक जीवन और विचारों को याद किया। कार्यक्रम में योगी ने कल्याण सिंह के योगदान के साथ विपक्ष, राजनीतिक शिष्टाचार और महापुरुषों के सम्मान को लेकर भी तीखे सवाल उठाए।
‘बाबूजी’ हमेशा प्रेरणा के स्रोत रहेंगे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन लोगों के लिए राष्ट्र सर्वोपरि है और भारत के शाश्वत मूल्य एवं आदर्श सबसे महत्वपूर्ण हैं, उनके लिए कल्याण सिंह हमेशा प्रेरणा बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार उनके सपनों को साकार करने की दिशा में काम करती रहेगी।
योगी ने कल्याण सिंह के व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि वह दबाव में झुकने वाले नेता नहीं थे। उनका कथन था कि ‘कल्याण सिंह टूट तो सकता है, लेकिन झुक नहीं सकता।’ मुख्यमंत्री के मुताबिक, उन्होंने जीवनभर अपने इस संकल्प का पालन किया।
राम मंदिर आंदोलन में योगदान को किया याद
मुख्यमंत्री ने कहा कि कल्याण सिंह ने सनातन मूल्यों की रक्षा करते हुए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। योगी ने कहा कि सनातन परंपरा से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को उनके योगदान का सम्मान करना चाहिए।
उनके संबोधन में कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत और अयोध्या आंदोलन से जुड़े उनके योगदान पर खास जोर रहा।

सपा पर श्रद्धांजलि को लेकर निशाना
कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कल्याण सिंह के निधन के समय सपा नेताओं ने न तो उनकी अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया और न ही सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि दी।
योगी ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन किसी वरिष्ठ नेता के निधन पर श्रद्धांजलि देना लोकतांत्रिक शिष्टाचार है। उन्होंने कहा कि इसे केवल कल्याण सिंह का नहीं, बल्कि उनके सामाजिक समुदाय और सनातन परंपरा से जुड़े लोगों का अपमान माना गया।
‘गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं’
सपा पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग समय और परिस्थितियों के हिसाब से अपना राजनीतिक रुख बदलते हैं। उन्होंने ‘P’ शब्द के अलग-अलग अर्थ बताए जाने का जिक्र करते हुए विपक्ष पर कटाक्ष किया।
योगी के इस बयान को सपा की राजनीति और उसके बदलते राजनीतिक नैरेटिव पर सीधा हमला माना जा रहा है।
मायावती का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि कल्याण सिंह के निधन पर कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती का उदाहरण देते हुए कहा कि वह भी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंची थीं।
इसके जरिए योगी ने राजनीतिक विरोध के बावजूद अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि जैसे अवसरों पर शिष्टाचार निभाने की परंपरा पर जोर दिया।
संस्थानों के नाम बदलने पर भी सवाल
योगी ने अपने संबोधन में सरकारी संस्थानों के नाम बदलने के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कन्नौज में डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर बने अस्पताल और मैनपुरी में अहिल्याबाई होलकर के नाम से जुड़े संस्थान के नाम बदले जाने का दावा किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज और देश के निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुषों का सम्मान होना चाहिए। उनके नाम पर बने संस्थानों के नाम राजनीतिक हितों के आधार पर बदलना उचित नहीं है।
कल्याण सिंह की विरासत पर सियासत
कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर योगी आदित्यनाथ का पूरा संबोधन उनकी राजनीतिक विरासत, राम मंदिर आंदोलन और राष्ट्रवादी विचारधारा के इर्द-गिर्द रहा। साथ ही सपा पर उनके हमले ने कार्यक्रम को राजनीतिक रंग भी दिया।
कल्याण सिंह की विरासत आज भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रभावशाली संदर्भ बनी हुई है। ऐसे में उनकी पुण्यतिथि पर उठे ये मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस को और धार दे सकते हैं।

