गोरखपुर में डॉक्टरों और अफसरों समेत कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में आरोपी बाप-बेटी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। जेल में बंद गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह के खिलाफ अब 7वीं FIR दर्ज हुई है। एक पीड़ित ने 83.87 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया है। मामले के बाद पुलिस गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी में है।
जेल में चार महीने की बच्ची के साथ बंद है गरिमा
एम्स थाने की पुलिस ने 1.47 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में 3 अगस्त को गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह को गिरफ्तार किया था। दोनों फिलहाल जेल में हैं। गरिमा महिला बैरक में अपनी चार महीने की बच्ची के साथ है, जबकि उसके पिता अलग बैरक में बंद हैं।
जेल सूत्रों के मुताबिक, बच्ची के रोने पर गरिमा उसे लोरी सुनाकर शांत करती है और कहती है कि जल्द जमानत हो जाएगी और वे दोनों बाहर निकल जाएंगे।
‘गलतफहमी में गिरफ्तार किया गया’, जेल में दावा
गरिमा दो बच्चों की मां है। उसका पति कुशीनगर में शिक्षक है और मुकदमे में आरोपी बनाए जाने के बाद से फरार बताया जा रहा है। 12 वर्षीय बेटे को रिश्तेदार के यहां रखा गया है, जबकि चार महीने की बच्ची अपनी मां के साथ जेल में है।

जेल सूत्रों के अनुसार, गरिमा महिला बंदियों से खुद को निर्दोष बताते हुए कहती है कि उसे गलतफहमी में गिरफ्तार किया गया है और जल्द सही स्थिति सामने आ जाएगी। जेल में बच्ची के साथ होने के कारण उसे पौष्टिक भोजन, दूध और फल उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सुग्रीव सिंह से 83.87 लाख की ठगी का आरोप
इस मामले में 16 अगस्त को तिवारीपुर थाने में सुग्रीव सिंह ने FIR दर्ज कराई। यह बाप-बेटी के खिलाफ दर्ज सातवीं FIR बताई जा रही है। इससे पहले एम्स, गोरखनाथ और सहजनवां थानों में अलग-अलग पीड़ितों की शिकायत पर छह मामले दर्ज हो चुके हैं।
सुग्रीव सिंह एक इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं। उनका आरोप है कि ध्रुव नारायण सिंह ने उन्हें RBI की एक योजना के नाम पर निवेश में 8 प्रतिशत लाभ का भरोसा दिया। कथित तौर पर दूसरे व्यक्ति के खाते में 80 लाख रुपये आने का उदाहरण दिखाकर उन्हें भी विश्वास में लिया गया।
छह बैंकों से कराया गया 83.87 लाख का लोन
शिकायत के मुताबिक, गरिमा सिंह ने दस्तावेज लेकर सुग्रीव के नाम पर छह बैंकों और वित्तीय संस्थानों से करीब 83.87 लाख रुपये का लोन कराया। आरोप है कि इसमें से 77 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर करा लिए गए, जबकि करीब 6.35 लाख रुपये सुग्रीव के खाते में छोड़े गए।
सुग्रीव का कहना है कि उन्हें भरोसा दिया गया था कि एक साल के भीतर लोन खत्म हो जाएगा। शुरुआत में कुछ महीनों तक किस्तें भी भरी गईं, लेकिन बाद में भुगतान बंद हो गया।
हर महीने 1.90 लाख की EMI का दबाव
सुग्रीव के मुताबिक, जून 2025 में विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लोन कराया गया था। अब उनकी कुल मासिक किस्त करीब 1 लाख 90 हजार 736 रुपये बताई जा रही है।
बैंकों की ओर से लगातार रिकवरी के लिए दबाव बनाए जाने से वह आर्थिक और मानसिक परेशानी में हैं। जब वह ध्रुव नारायण सिंह के घर पहुंचे तो कथित तौर पर उन्हें पता चला कि कई अन्य लोग भी इसी तरह की शिकायत लेकर वहां पहुंचे थे।
डॉ. परमात्मा सिंह की मौत के बाद बढ़ी जांच
मामले ने 13 अगस्त को उस समय गंभीर मोड़ लिया, जब ठगी के शिकार बताए जा रहे डॉ. परमात्मा सिंह ने एक अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। इस घटना के बाद पुलिस ने मामले को और गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
पुलिस अब दर्ज मामलों, कथित आर्थिक लेनदेन और अन्य पीड़ितों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने की बात सामने आई है।
एक के बाद एक FIR सामने आने से गोरखपुर में कथित करोड़ों की ठगी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। 83.87 लाख रुपये की नई शिकायत ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब पुलिस के सामने आरोपों की पुष्टि, आर्थिक लेनदेन की पूरी कड़ी सामने लाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की चुनौती है।

