मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में निर्मित भवनों के ऑक्यूपेंसी (अधिभोग) उल्लंघन मामलों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि फिलहाल नगर निगम भोपाल ऐसे मामलों में कोई कठोर कार्रवाई नहीं करेगा। पहले एक उच्चस्तरीय समिति सभी पहलुओं का अध्ययन करेगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार आगे की नीति तय करेगी।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
भोपाल में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, नगर एवं ग्राम निवेश आयुक्त कौशलेन्द्र सिंह, भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में अधिभोग उल्लंघन से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप बनेगी नीति
बैठक में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा संबंधित मामलों में दिए गए आदेशों के अनुपालन के लिए राज्य सरकार व्यापक अध्ययन के बाद नीतिगत निर्णय लेगी। इस प्रक्रिया में पर्यावरण संरक्षण, जनहित, रोजगार, उद्योग और शहरी विकास जैसे विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।

उच्चस्तरीय समिति करेगी समीक्षा
सरकार ने निर्णय लिया है कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। समिति में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य होंगे। भोपाल कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। समिति सभी संबंधित पहलुओं की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।
रिपोर्ट आने तक नहीं होगी सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट आने और राज्य सरकार द्वारा आगे की प्रक्रिया तय किए जाने तक नगर निगम भोपाल अधिभोग उल्लंघन के मामलों में किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई नहीं करेगा। इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और राज्य सरकार की नई नीति के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नागरिकों और प्रशासन के लिए अहम फैसला
सरकार का यह निर्णय उन लोगों के लिए राहत माना जा रहा है, जिनके भवन ऑक्यूपेंसी उल्लंघन से जुड़े मामलों में जांच के दायरे में हैं। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय पर्यावरण संरक्षण, कानून के पालन और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा। अब सभी की नजरें उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर बनने वाली नई नीति पर टिकी हैं।

