पंजाब में बेअदबी कानून को लेकर सियासत और धार्मिक हलकों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार को एक महीने के भीतर कानून में संशोधन करने का निर्देश दिया है। इसी सिलसिले में 29 जून को आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल समेत विभिन्न दलों के सिख विधायक और मंत्री नंगे पैर अकाल तख्त पहुंचे और पांच सिंह साहिबानों के सामने लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। इस दौरान कुछ AAP विधायकों ने स्वीकार किया कि उन्होंने विधेयक का मसौदा पूरी तरह पढ़े बिना ही उस पर हस्ताक्षर कर दिए थे।
क्या है अकाल तख्त और क्यों है इतना प्रभावशाली?
अकाल तख्त सिख धर्म का सर्वोच्च धार्मिक और सांसारिक (राजनीतिक) केंद्र माना जाता है। इसका अर्थ है “अमर का सिंहासन”। इसकी स्थापना छठे सिख गुरु गुरु हरगोबिंद साहिब ने अमृतसर स्थित हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) परिसर में की थी। अकाल तख्त से जारी होने वाले हुक्मनामे पूरी दुनिया के सिख समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सिख परंपरा में इसे न्याय, मर्यादा और पंथ की एकता का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है।

सिख धर्म के पांच तख्त
- अकाल तख्त साहिब – अमृतसर, पंजाब
- तख्त श्री केशगढ़ साहिब – आनंदपुर साहिब, पंजाब
- तख्त श्री दमदमा साहिब – तलवंडी साबो, पंजाब
- तख्त श्री पटना साहिब – पटना, बिहार
- तख्त श्री हजूर साहिब – नांदेड़, महाराष्ट्र
बेअदबी कानून पर क्यों उठा विवाद?
पंजाब सरकार ने ‘जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026’ पारित किया था। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। हालांकि, अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने कानून के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि सिख मर्यादा और धार्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों पर विधानसभा द्वारा निर्णय लेना उचित नहीं है।
बैठक के दौरान जत्थेदार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुराने बयानों का भी उल्लेख किया और मंत्रियों से कानून के कुछ प्रावधानों पर सवाल पूछे। बताया गया कि कुछ मंत्री स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। वहीं, कुछ AAP विधायकों ने स्वीकार किया कि उन्होंने विधेयक को विस्तार से पढ़े बिना ही समर्थन दिया था।
अकाल तख्त का आदेश और उसका प्रभाव
अकाल तख्त ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि एक महीने के भीतर कानून में आवश्यक संशोधन किए जाएं और तब तक इसे लागू न किया जाए। साथ ही आदेश का पालन नहीं होने पर धार्मिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
हालांकि, अकाल तख्त के आदेशों की कोई संवैधानिक या कानूनी बाध्यता नहीं होती, लेकिन सिख समुदाय में उनकी गहरी धार्मिक और नैतिक मान्यता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री और विधायक तक अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखते हैं। सिख समाज में अकाल तख्त की मर्यादा और उसके निर्णयों को सर्वोच्च सम्मान प्राप्त है।

