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Tuesday, July 21, 2026
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भगवंत मान वीडियो केस में बड़ा खुलासा, फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट के लिए 10 लाख की डील

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के वायरल वीडियो से जुड़े कथित फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट मामले में गुरुग्राम पुलिस की जांच ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने लाए हैं। पुलिस का दावा है कि शिकायतकर्ता पर कथित तौर पर दबाव बनाकर फर्जी रिपोर्ट तैयार करवाई गई, जबकि इस पूरे मामले में लाखों रुपये के लेनदेन और फर्जी पहचान का भी खुलासा हुआ है।

शिकायतकर्ता ने लगाए दबाव और धमकी के आरोप

पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता जसप्रीत ने बयान दिया है कि उस पर पंजाब के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से वायरल वीडियो की कथित फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाने का दबाव बनाया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि ऐसा नहीं करने पर उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस इन आरोपों की भी जांच कर रही है।

होटल में हुई 10 लाख रुपये की डील

जांच में सामने आया कि डर के कारण जसप्रीत ने अरुण और अंकित नामक दो व्यक्तियों से संपर्क किया। इसके बाद गुरुग्राम के सेक्टर-29 स्थित क्राउन प्लाजा होटल में कथित तौर पर फर्जी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 10 लाख रुपये की डील हुई। पुलिस ने होटल की सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में लेकर पूरे घटनाक्रम की जांच तेज कर दी है।

भगवंत मान वीडियो केस में बड़ा खुलासा, फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट के लिए 10 लाख की डील

फॉरेंसिक लैब के नाम पर तैयार की गई रिपोर्ट

एसीपी क्राइम नवीन शर्मा के अनुसार, आरोपी अरुण ने ‘साइबर यान’ और अंकित ने ‘साइबर सेंटिनल’ के नाम से रिपोर्ट तैयार की। जांच में पता चला कि दोनों किसी भी मान्यता प्राप्त या अधिकृत फॉरेंसिक लैब से जुड़े नहीं थे। पुलिस के मुताबिक, रिपोर्ट तैयार करने के एवज में 10 लाख रुपये का भुगतान हुआ, जिसमें से अंकित के खाते में ऑनलाइन 50 हजार रुपये ट्रांसफर किए जाने की जानकारी भी मिली है।

दोनों आरोपी गिरफ्तार, तकनीकी जांच जारी

गुरुग्राम पुलिस ने अरुण और अंकित को गिरफ्तार कर अदालत से आठ दिन की पुलिस रिमांड हासिल की है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने के लिए किन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सॉफ्टवेयर और तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल किया गया था। डिजिटल साक्ष्यों की भी गहन जांच की जा रही है।

पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अरुण पंचकूला के एक सरकारी कार्यालय में कॉन्ट्रैक्ट पर पहचान पत्र बनाने का कार्य करता था, जबकि अंकित दिल्ली के एक सरकारी कार्यालय में संविदा कर्मचारी था। पुलिस अब इस मामले से जुड़े संभावित नेटवर्क, अन्य लोगों की भूमिका और कथित साजिश के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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