बिहार सरकार अन्य राज्यों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर नया विश्वविद्यालय अधिनियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस संबंध में राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
15 राज्यों के मॉडल का किया गया अध्ययन
राज्यपाल सचिवालय के अनुसार, 15 राज्यों के विश्वविद्यालय अधिनियमों का अध्ययन कर एक व्यापक प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयानुकूल बनाना है। नए कानून में उन प्रावधानों को शामिल किया जाएगा, जो विश्वविद्यालयों के बेहतर संचालन में मददगार साबित हुए हैं।

211 सरकारी कॉलेजों में होगी केंद्रीकृत भर्ती
बैठक में नवस्थापित 211 सरकारी डिग्री कॉलेजों में संविदा के आधार पर सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए केंद्रीकृत भर्ती प्रक्रिया अपनाने का निर्णय दोहराया गया। साथ ही यह भी तय किया गया कि प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के लिए हर वर्ष कम से कम एक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित करना अनिवार्य होगा।
NEP-2020 और शोध को मिलेगा बढ़ावा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि स्नातकोत्तर स्तर के 43 विषयों के नए पाठ्यक्रमों को जुलाई के पहले सप्ताह तक मंजूरी मिलने की संभावना है। इसके अलावा पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप, मुख्यमंत्री अनुसंधान अनुदान योजना और मुख्यमंत्री अनुसंधान छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
डिजिटल शिक्षा और लंबित डिग्रियों पर फोकस
बैठक में आईएनएफएलआईबीनेट, एपीएएआर और राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी जैसी डिजिटल पहलों की नियमित निगरानी पर जोर दिया गया। वहीं छात्रों को राहत देते हुए सभी लंबित डिग्रियां 30 सितंबर तक जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शिक्षकों के पदोन्नयन और स्थानांतरण की समयबद्ध प्रक्रिया लागू करने पर भी बल दिया गया।

