देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में शनिवार को आयोजित 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड ऐतिहासिक क्षणों की साक्षी बनी। राष्ट्रपति और भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में कुल 515 जेंटलमैन कैडेट अंतिम पग पार कर भारतीय सेना और मित्र देशों की सेनाओं का हिस्सा बने। इस अवसर ने भारतीय सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ा, क्योंकि पहली बार आईएमए से नौ महिला कैडेट सैन्य अधिकारी के रूप में पासआउट हुईं।
परेड का आयोजन सुबह 6:40 बजे शुरू हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह 7:30 बजे चैटवुड भवन पहुंचीं, जहां उन्हें सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया गया। उनके साथ उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने परेड की सलामी ली और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को सम्मानित किया।
इस बार पासिंग आउट परेड में कुल 515 कैडेट शामिल हुए, जिनमें 481 भारतीय कैडेट और 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट शामिल थे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये कैडेट अब अपने-अपने देशों की सेनाओं में अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। विदेशी कैडेटों की भागीदारी भारतीय सैन्य अकादमी की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और वैश्विक सैन्य सहयोग को भी दर्शाती है।
कार्यक्रम की सबसे खास उपलब्धि नौ महिला कैडेटों का पासआउट होना रहा। भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास में पहली बार महिला कैडेटों ने प्रशिक्षण पूरा कर सेना में अधिकारी के रूप में कदम रखा। इसे भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
परेड के बाद सुबह 9:30 बजे पीपिंग सेरेमनी आयोजित की गई, जिसमें नव नियुक्त अधिकारियों के कंधों पर सितारे लगाए गए। इस भावुक और गौरवपूर्ण अवसर पर कैडेटों के परिजन भी मौजूद रहे। वर्षों की कठिन ट्रेनिंग और अनुशासन के बाद सैन्य अधिकारी बनने का सपना पूरा होने पर परिवारों के चेहरे गर्व से चमक उठे।
राष्ट्रपति के दौरे और पासिंग आउट परेड को देखते हुए देहरादून में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। आईएमए परिसर और आसपास के क्षेत्रों को नो-ड्रोन जोन घोषित किया गया था, जबकि यातायात व्यवस्था को भी विशेष रूप से नियंत्रित किया गया। कार्यक्रम के समापन के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देहरादून एयरपोर्ट के लिए रवाना हुईं, जहां से उन्होंने दिल्ली के लिए प्रस्थान किया।
आईएमए की यह पासिंग आउट परेड न केवल नए सैन्य अधिकारियों के लिए गौरव का क्षण रही, बल्कि भारतीय सेना के इतिहास में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और सैन्य नेतृत्व में उनके सशक्त योगदान का भी प्रतीक बन गई।

