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Monday, April 20, 2026
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विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव से बाजार पर दबाव लगातार गहराता दिखा

शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से जारी उतार चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। बीते सप्ताह टॉप दस कंपनियों में से छह कंपनियों के मार्केट कैप में लगभग पैंसठ हजार करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर दबाव बना हुआ है। सेंसेक्स में भी दो सौ तिरेसठ अंकों की गिरावट देखने को मिली है जबकि निफ्टी एक सौ छह अंकों तक फिसल गया है। यह लगातार छठा सप्ताह है जब बाजार में कमजोरी का रुख बना हुआ है। इस तरह की लगातार गिरावट निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर रही है और बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

बड़ी कंपनियों पर पड़ा असर

बाजार की इस कमजोरी का असर देश की बड़ी और दिग्गज कंपनियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान भारती एयरटेल को हुआ है जहां कंपनी का मार्केट कैप लगभग उनतीस हजार करोड़ रुपये घट गया है। इसके बाद आईसीआईसीआई बैंक बजाज फाइनेंस एचडीएफसी बैंक हिंदुस्तान यूनिलीवर और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जैसी कंपनियों के मूल्यांकन में भी गिरावट दर्ज की गई है। इन कंपनियों का प्रदर्शन आमतौर पर बाजार को स्थिरता प्रदान करता है लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ये भी दबाव से बच नहीं पाई हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार में गिरावट का प्रभाव व्यापक है और यह केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव से बाजार पर दबाव लगातार गहराता दिखा

कुछ कंपनियों ने दिखाई मजबूती

हालांकि इस गिरावट के बीच कुछ कंपनियों ने सकारात्मक प्रदर्शन भी किया है। टीसीएस इंफोसिस लार्सन एंड टुब्रो और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के मार्केट कैप में बढ़ोतरी देखने को मिली है। रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है और उसने अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रखा है। इन कंपनियों की मजबूती यह संकेत देती है कि कुछ सेक्टर अभी भी निवेशकों का भरोसा बनाए हुए हैं। खासकर आईटी और कुछ इंडस्ट्रियल कंपनियों ने स्थिर प्रदर्शन किया है जो बाजार के लिए संतुलन का काम कर रहा है। इसके बावजूद कुल मिलाकर बाजार का रुझान कमजोर ही बना हुआ है और निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

गिरावट के पीछे के प्रमुख कारण और आगे का संकेत

बाजार में इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव कच्चे तेल की कीमतों में उछाल विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रुपये में कमजोरी और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता ने निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है। इन सभी कारकों ने मिलकर बाजार पर दबाव बढ़ाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भी अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए और जोखिम को ध्यान में रखते हुए निवेश करना चाहिए।

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