भोपाल के सियासी माहौल में Bhopal के भीतर Madhya Pradesh Congress संगठन और विधायक दल के बीच समन्वय की कमी खुलकर सामने आ रही है। राज्यसभा चुनाव के नजदीक आते ही यह दूरी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बनती दिख रही है। विधायकों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि संगठन उनकी कानूनी और राजनीतिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं रहा है। इस स्थिति ने पार्टी के भीतर भरोसे की कमी को बढ़ा दिया है और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं।
नेतृत्व और असंतोष का उभरता स्वर
पार्टी के भीतर कुछ विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं में यह असंतोष भी बढ़ रहा है कि नेतृत्व केवल चुनिंदा नेताओं पर ही ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस वजह से अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं में उपेक्षा की भावना पनप रही है। इससे विधायक दल में बिखराव जैसी स्थिति बनती दिखाई दे रही है। हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि अंदरूनी मतभेद अब केवल चर्चा तक सीमित नहीं हैं बल्कि संगठनात्मक ढांचे पर भी असर डाल रहे हैं।

राजेंद्र भारती प्रकरण से बढ़ा विवाद
दतिया से विधायक रहे Rajendra Bharti की अयोग्यता को रोकने के लिए प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari ने विधानसभा सचिवालय में देर रात विरोध दर्ज कराया। इस कदम को लेकर पार्टी के भीतर अलग अलग राय सामने आई है। कुछ लोग इसे नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar के अधिकारों पर अतिक्रमण मान रहे हैं। इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर मौजूद असंतुलन और नेतृत्व स्तर पर समन्वय की कमी को और उजागर कर दिया है।
राज्यसभा चुनाव और भविष्य की चुनौती
राज्यसभा चुनाव के लिहाज से यह स्थिति कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गई है। मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है और एक सीट सुरक्षित करने के लिए लगभग अठावन विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। वर्तमान में कांग्रेस के पास सीमित संख्या में विधायक बचे हैं और क्रॉस वोटिंग का डर भी बना हुआ है। विधायक दल में असंतोष और संगठनात्मक मतभेद पार्टी की रणनीति को कमजोर कर सकते हैं। इस बीच Hemant Katare के इस्तीफे को भी इसी आंतरिक खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं Sanjay Kamle ने स्पष्ट किया है कि संगठन पूरी तरह सक्षम है और सभी मिलकर पार्टी के हित में काम करेंगे।

