देश के रेस्टोरेंट सेक्टर में टैक्स चोरी की सनसनीखेज घटना सामने आई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने देशभर के लगभग 70 रेस्टोरेंट्स का सर्वे किया, जिनमें बिलिंग सॉफ्टवेयर में हेरफेर करके 70,000 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाने का आरोप है। आयकर विभाग के इन्क्वेस्टिगेशन विंग ने रविवार को इस बड़े पैमाने पर जांच की शुरुआत की। विभाग का कहना है कि इस जांच का मकसद रेस्टोरेंट मालिकों द्वारा कर चुकाने से बचने के लिए की गई गड़बड़ी को उजागर करना है।
रेस्टोरेंट मालिकों ने किया सॉफ्टवेयर में हेरफेर
जांच में पता चला कि कुछ रेस्टोरेंट मालिकों ने विशेष बिलिंग सॉफ्टवेयर के बैकएंड में बदलाव कर ग्राहकों को बिल देने के बाद कैश इनवॉयस को एडिट या डिलीट कर दिया। इस तरह वे अपनी वास्तविक बिक्री को छुपाकर टैक्स बचा रहे थे। सबसे ज्यादा टैक्स चोरी के मामले कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु से सामने आए हैं। महाराष्ट्र और गुजरात भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। अनुमान है कि सिर्फ सर्वे किए गए रेस्टोरेंट्स में ही लगभग 700 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाई गई है।

शहरों और राज्यों में चल रही जांच
देश के 45 शहरों में ये सर्वे किए जा रहे हैं। इसमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, शिमला, गुवाहाटी, जयपुर, चेन्नई, पुणे, लुधियाना, पटना जैसे बड़े शहर शामिल हैं। आंध्र प्रदेश में राजमुंदरी, नेल्लोर और विशाखापत्तनम, हरियाणा में गुरुग्राम और समालखा, उत्तर प्रदेश में नोएडा, हापुड़, गाजियाबाद और लखनऊ, तमिलनाडु में चेन्नई, कोयंबटूर और मदुरै, केरल में मलप्पुरम और कोझिकोड जैसी जगहों में सर्वे चल रहे हैं। विभाग ने हर रेस्टोरेंट का ट्रांजेक्शन डेटा विस्तार से जांचने के लिए टीम बनाई है।
AI और डेटा एनालिटिक्स की मदद से खुला बड़ा खेल
इस घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग किया गया। लगभग 60 टेराबाइट (TB) ट्रांजेक्शनल डेटा का विश्लेषण करके यह पता लगाया गया कि रेस्टोरेंट मालिकों ने किन डेटा को डिलीट किया। 6 साल के डेटा का मिलान ग्राहकों के UPI पेमेंट और GST रिटर्न के साथ किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि रेस्टोरेंट्स ने सॉफ्टवेयर के ‘Bulk Delete’ फीचर का उपयोग कर पूरे महीने के सेल्स डेटा को मिटा दिया। कुछ मामलों में 2,000 रुपये का बिल बदलकर सिर्फ 20 रुपये दिखाए गए। इस तरह टैक्स और GST की चोरी की गई।

