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Monday, April 20, 2026
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पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दिए सख्त निर्देश

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के खिलाफ ममता बनर्जी और अन्य TMC सांसदों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में सुनवाई हुई। कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि वह हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से सलाह लेकर एक नोटिफिकेशन जारी करे। इस नोटिफिकेशन के तहत एक अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाया जाएगा जिसमें एक पूर्व CJ और अन्य जज शामिल होंगे। यह ट्रिब्यूनल उन अपीलों की सुनवाई करेगा जिनकी अर्जी ज्यूडिशियल ऑफिसर द्वारा खारिज की जा रही हैं। ट्रिब्यूनल का खर्च चुनाव आयोग उठाएगा, जबकि ज्यूडिशियल ऑफिसर को रिजेक्ट किए गए मामलों का कारण बताना अनिवार्य होगा।

ज्यूडिशियल ऑफिसर की भूमिका और राज्य सरकार की स्थिति

राज्य सरकार की ओर से वकील मेनका गुरुस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स ने अब तक लगभग 7 लाख केस प्रोसेस किए हैं। कुल 63 लाख केस हैं, जिनमें से करीब 57 लाख अभी भी लंबित हैं। कोर्ट ने हाई कोर्ट के CJ के कम्युनिकेशन का हवाला देते हुए कहा कि 10 लाख से ज्यादा ऑब्जेक्शन निपटा दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल से 500 से ज्यादा, ओडिशा और झारखंड से 200 ज्यूडिशियल ऑफिसर तैनात किए गए हैं और दिन-रात काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए कि वह ज्यूडिशियल ऑफिसर को लॉजिस्टिक और तकनीकी मदद उपलब्ध कराए।

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दिए सख्त निर्देश

CJI सूर्यकांत ने जताई नाराजगी और चेतावनी

CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि एडवांस पिटीशन से गलत संदेश जाता है कि पिटीशनर सिस्टम पर भरोसा नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल ऑफिसर से सवाल करना और एप्लीकेशन फाइल करने की हिम्मत करना गंभीर मुद्दा है। CJI ने स्पष्ट किया कि कोर्ट को अवमानना का नोटिस जारी करना पड़ सकता है और जवाब उसी भाषा में देना होगा जो अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि अब स्थिति ऐसी आ गई है कि दोनों पक्षों की सच्चाई पर शक हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए स्पष्ट निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ज्यूडिशियल अधिकारियों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। अधिकारियों की छुट्टियां कैंसिल कर दी गई हैं और नए लॉगिन IDs तुरंत बनाना सुनिश्चित किया जाएगा। ECI को कोई ऐसा नियम लागू नहीं करना चाहिए जिससे अधिकारियों को परेशानी हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों को पूरी तकनीकी और लॉजिस्टिक मदद मिलनी चाहिए ताकि प्रक्रिया में किसी तरह की देरी या बाधा न आए। इस आदेश से स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट प्रक्रिया की पारदर्शिता और समयबद्धता पर पूरी तरह ध्यान दे रही है।

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