संसद मार्च को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि यह अब केवल एक रैली नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की मांग का प्रतीक बन गया है। उन्होंने शिक्षा और बेरोजगारी के मुद्दों पर युवाओं की भागीदारी को ऐतिहासिक बताया।
दिल्ली में संसद मार्च के बीच सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर देशभर के युवाओं की व्यापक भागीदारी का प्रतीक बन चुका है। वहीं दूसरी ओर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के संकेत भी मिले हैं।
संसद मार्च पर योगेंद्र यादव की प्रतिक्रिया
संसद मार्च को लेकर योगेंद्र यादव ने कहा कि जो मार्च होना था, वह पहले रैली बना, फिर रैली का रेला और अब मेले का रूप ले चुका है। उनके अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में युवा, छात्र और बेरोजगार दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि यह दृश्य बताता है कि लोकतंत्र में संसद तक पहुंचने का रास्ता जनता और सड़क से होकर गुजरता है।

शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर युवाओं की भागीदारी
योगेंद्र यादव ने दावा किया कि लंबे समय बाद शिक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर देशभर के युवा स्वतः सड़कों पर उतरे हैं। उनके अनुसार, यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के आह्वान पर नहीं, बल्कि युवाओं की अपनी चिंताओं और आकांक्षाओं के कारण खड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस ऊर्जा का उपयोग व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव के लिए होना चाहिए।
“अब केवल इस्तीफे का सवाल नहीं”
योगेंद्र यादव ने कहा कि यह मामला अब किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है। उनके मुताबिक, शिक्षा, रोजगार और जवाबदेही से जुड़े व्यापक सुधारों की मांग अब आंदोलन का प्रमुख विषय बन गई है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में सुधार के लिए गंभीर संवाद और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
संसद के पास बढ़ी सुरक्षा, कई घटनाक्रम साथ-साथ
इस बीच संसद के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा आंसू गैस के इस्तेमाल और प्रदर्शनकारियों को रोकने की खबरें सामने आईं। वहीं CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में लिया है। हालांकि, इस दावे पर पुलिस की ओर से तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
सरकार से बातचीत का दावा
सौरव दास ने यह भी बताया कि उनकी और आशुतोष रांका की केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से लगभग 10 मिनट की मुलाकात हुई, जिसमें उन्होंने अपनी मांगों का लिखित ज्ञापन सौंपा। उनके अनुसार, सरकार की ओर से आगे बातचीत का आश्वासन दिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजर संभावित वार्ता और आंदोलन के अगले चरण पर टिकी हुई है।
दिल्ली में जारी संसद मार्च अब राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन चुका है। एक ओर प्रदर्शनकारी शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार के साथ संवाद की संभावनाएं भी बनती दिख रही हैं। आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजर बनी रहेगी।

