इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े चर्चित कैश बरामदगी मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस शील नागू ने खुद को मामले से अलग कर लिया। अब नई बेंच का गठन भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत करेंगे।
जस्टिस शील नागू ने सुनवाई से बनाई दूरी
सुप्रीम कोर्ट में पूर्व जज यशवंत वर्मा से जुड़े कैश बरामदगी मामले पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस शील नागू ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग (रिक्यूज़) कर लिया। इसके बाद मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत के समक्ष भेज दिया गया है, जो अब यह तय करेंगे कि इस याचिका पर कौन-सी नई पीठ सुनवाई करेगी।
यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय की ओर से दायर की गई है।
पहले जांच समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं जस्टिस नागू
मामले से जुड़े घटनाक्रम के अनुसार, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने वर्ष 2025 में आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय इन-हाउस समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता जस्टिस शील नागू ने की थी।

समिति में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावलिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की न्यायाधीश अनु शिवरामन भी सदस्य थीं। इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए जस्टिस नागू ने अब इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया।
कैश बरामदगी मामला क्या है?
मार्च 2025 में होली के दौरान दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास के एक स्टोररूम में आग लगने की घटना हुई थी। आग बुझाने के बाद वहां से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की जानकारी सामने आई थी। रिपोर्टों के अनुसार, बरामद नकदी में कुछ नोट जले हुए भी थे।
इस घटना के बाद जस्टिस वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था और उन्हें न्यायिक कार्यों से अलग कर दिया गया। बाद में उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।
महाभियोग की प्रक्रिया भी हुई थी शुरू
कैश बरामदगी विवाद के बाद गठित इन-हाउस जांच समिति ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की सिफारिश की थी। इसके बाद संसद के दोनों सदनों में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, जिसे लोकसभा और राज्यसभा के कई सांसदों का समर्थन मिला।
हालांकि, महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले ही जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
अब आगे क्या होगा?
जस्टिस शील नागू के मामले से अलग होने के बाद अब CJI सूर्य कांत नई पीठ का गठन करेंगे। नई बेंच यह तय करेगी कि जनहित याचिका पर आगे किस प्रकार सुनवाई होगी और याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों पर क्या निर्देश दिए जाने चाहिए।
पूर्व जज यशवंत वर्मा से जुड़ा कैश बरामदगी मामला न्यायपालिका से जुड़े चर्चित मामलों में शामिल रहा है। जस्टिस शील नागू के सुनवाई से अलग होने के बाद अब सभी की नजरें CJI सूर्य कांत के अगले कदम और नई बेंच के गठन पर टिकी हैं। मामले में आगे की सुनवाई के बाद ही कानूनी प्रक्रिया की अगली दिशा स्पष्ट होगी।

