देहरादून में शनिवार को महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में पारित न होने के विरोध में जोरदार जन आक्रोश महिला पदयात्रा निकाली गई। यह पदयात्रा परेड मैदान से शुरू हुई जहां बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्र हुईं। प्रदेशभर से हजारों महिलाएं इस रैली में शामिल होने के लिए देहरादून पहुंचीं। पूरे आयोजन में महिला शक्ति की एकजुटता और राजनीतिक मुद्दों पर नाराजगी साफ तौर पर देखने को मिली। पदयात्रा का उद्देश्य महिला आरक्षण को लेकर सरकार और विपक्ष पर दबाव बनाना बताया गया।
सीएम धामी की मौजूदगी में दिखा राजनीतिक संदेश
इस रैली में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी परेड मैदान पहुंचे और कार्यक्रम में शामिल हुए। उनकी मौजूदगी को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि यह कार्यक्रम भाजपा महिला मोर्चा द्वारा आयोजित किया गया था। हजारों महिलाओं की भीड़ और उत्साह ने रैली को शक्ति प्रदर्शन का रूप दे दिया। मंच से महिला आरक्षण अधिनियम यानी 33 प्रतिशत आरक्षण को लेकर मजबूत समर्थन व्यक्त किया गया और इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया गया।

कांग्रेस पर दोहरे रवैये के आरोप तेज
रैली के दौरान विपक्ष विशेषकर कांग्रेस पर तीखे हमले किए गए। आरोप लगाया गया कि संसद में महिला आरक्षण बिल का समर्थन न करना और राज्यों में इसके पक्ष में आवाज उठाना कांग्रेस के दोहरे रवैये को दर्शाता है। वक्ताओं ने इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताया और कहा कि इससे राजनीतिक अस्थिरता का संदेश जाता है। महिला प्रतिभागियों ने भी इस मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और इसे मातृशक्ति के सम्मान से जोड़कर देखा गया।
महिला एकजुटता का बड़ा राजनीतिक संदेश
यह जन आक्रोश रैली केवल विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि महिला एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन बन गई। हजारों महिलाओं की भागीदारी ने इसे प्रदेश स्तर पर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक आयोजन बना दिया। रैली के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि महिला आरक्षण को लेकर किसी भी तरह की देरी या राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी। कार्यक्रम ने यह भी दिखाया कि आने वाले समय में महिला मतदाता राजनीतिक फैसलों पर बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं।

