18 जून 2026 को आयोजित NEET UG री-एग्जाम को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने दावा किया था कि इस बार परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित होगी। पिछले वर्ष पेपर लीक विवाद के बाद सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक मजबूत किया गया था। हालांकि परीक्षा के दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आई घटनाओं ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए। बिहार में सॉल्वर गैंग, हैदराबाद में मोबाइल से नकल, जयपुर में परीक्षा केंद्र के भीतर फोन ले जाने की कोशिश और इंदौर में AI से तैयार फर्जी पेपर बेचने जैसे मामलों ने परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर कर दिया।
बिहार में मेडिकल छात्रों का सॉल्वर गैंग पकड़ा गया
सबसे बड़ा खुलासा बिहार के लखीसराय जिले में हुआ, जहां पुलिस ने तीन परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी कर एक बड़े सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया। जांच में सामने आया कि कई मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र पैसे लेकर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। पुलिस ने 12 मेडिकल छात्रों समेत कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया। जांच में यह भी सामने आया कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में मिलीभगत कर फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाया गया। आरोप है कि प्रत्येक उम्मीदवार से 10 से 12 लाख रुपये तक वसूले गए थे। मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सौंप दी गई है।

हैदराबाद और जयपुर में नकल के नए तरीके
हैदराबाद के एक परीक्षा केंद्र में एक अभ्यर्थी ने परीक्षा शुरू होने से पहले स्कूल के शौचालय के फ्लश टैंक में मोबाइल फोन छिपा दिया। परीक्षा के दौरान वह पेट दर्द का बहाना बनाकर वॉशरूम गया और मोबाइल से उत्तर खोजने लगा, लेकिन निरीक्षकों ने उसे पकड़ लिया। वहीं जयपुर में एक छात्रा ने अंडरगारमेंट्स में मोबाइल छिपाकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश किया। मेटल डिटेक्टर की चेतावनी को उसने बहाने से नजरअंदाज करवा दिया। हालांकि परीक्षा समाप्त होने से पहले उत्तर पुस्तिका की तस्वीर लेने की कोशिश करते समय वह पकड़ी गई। जैमर लगे होने के कारण वह तस्वीरें बाहर नहीं भेज सकी।
AI और ChatGPT का इस्तेमाल कर बेचा गया फर्जी पेपर
मध्य प्रदेश के इंदौर में एक युवक ने ChatGPT और अन्य AI टूल्स की मदद से फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर उसे असली NEET री-एग्जाम पेपर बताकर सोशल मीडिया पर बेचना शुरू कर दिया। आरोपी इंस्टाग्राम के जरिए छात्रों को फंसाता था और 100 से 200 रुपये लेकर पीडीएफ भेजता था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जांच में कई डिजिटल सबूत और फर्जी प्रश्नपत्र बरामद हुए हैं। इस मामले ने परीक्षा धोखाधड़ी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
क्या पूरी तरह सुरक्षित हो सकती है परीक्षा प्रणाली?
री-NEET 2026 ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सुरक्षा व्यवस्था चाहे कितनी भी मजबूत क्यों न हो, परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले नए रास्ते तलाश लेते हैं। सकारात्मक पहलू यह रहा कि बड़े पैमाने पर पेपर लीक जैसी घटना सामने नहीं आई और कई मामलों में सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते कार्रवाई की। लेकिन दूसरी ओर बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध, मेडिकल छात्रों की संलिप्तता, मोबाइल आधारित नकल और AI से तैयार फर्जी पेपर जैसे मामलों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब चुनौती सिर्फ तकनीक मजबूत करने की नहीं, बल्कि उन लोगों पर लगाम लगाने की भी है जो सिस्टम को तोड़ने के लिए लगातार नए तरीके विकसित कर रहे हैं।

