भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए नई टीम का ऐलान किया है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व वाली टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 8 राष्ट्रीय महासचिव और 16 राष्ट्रीय सचिव शामिल हैं। वसुंधरा राजे, राम माधव, स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े और बैजयंत पांडा जैसे अनुभवी नामों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी है। इसलिए नई टीम में क्षेत्रीय पकड़ और संगठनात्मक अनुभव दोनों को महत्व दिया गया है।
दिल्ली के बाद यूपी को सबसे ज्यादा तवज्जो
राज्यवार तस्वीर देखें तो दिल्ली का प्रतिनिधित्व सबसे मजबूत दिखाई देता है। इसके बाद उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह मिली है।
यूपी से रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जबकि स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए हैं। डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव राष्ट्रीय सचिव हैं। अमरपाल मौर्य और कुंवर बासित अली को क्रमशः ओबीसी और अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी मिली है।
खास तौर पर स्मृति ईरानी की राष्ट्रीय महासचिव के रूप में वापसी को यूपी की आगामी चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
मध्य प्रदेश से छह, राजस्थान-महाराष्ट्र से चार-चार
मध्य प्रदेश से छह नेताओं को नई टीम में जगह मिली है। इनमें लाल सिंह आर्य, गजेंद्र पटेल, कविता पाटीदार और बंसीलाल गुर्जर प्रमुख नाम हैं।

राजस्थान से वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया जैसे नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिली है। महाराष्ट्र से विनोद तावड़े और पीयूष गोयल समेत चार नेता राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बने हैं। पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
गुजरात और उत्तराखंड का भी मजबूत प्रतिनिधित्व
गुजरात से चार नेताओं को जगह मिली है, जिनमें वर्षाबेन दोशी, जगदीश ईश्वरभाई पटेल, रोहन गुप्ता और हेमंग जोशी शामिल हैं। उत्तराखंड से तीरथ सिंह रावत, महेंद्र पांडेय, अनिल बलूनी और आलोक भट्ट को जिम्मेदारी दी गई है।
बिहार से सिद्धार्थ शंभू, ऋतुराज सिन्हा और शिवेश कुमार राम को जगह मिली है। पंजाब और हरियाणा से भी दो-दो नेता नई टीम में शामिल हैं।
पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत पर भी नजर
बीजेपी ने पूर्वोत्तर को भी संगठन में प्रमुखता दी है। त्रिपुरा के बिप्लब कुमार देब राष्ट्रीय महासचिव बने हैं, जबकि नगालैंड की फांग्नोन कोन्याक और असम की मृगांका देव बर्मन को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है।
दक्षिण भारत से डी. पुरंदेश्वरी, प्रो. एम. नागराजा, के. सुरेंद्रन, अनिल एंटनी और एम. वेंकटेशन को जिम्मेदारी मिली है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी राष्ट्रीय संगठन में दक्षिण और पूर्वोत्तर की मौजूदगी को भी मजबूत करना चाहती है।
नई टीम में क्या दिखती है रणनीति?
बीजेपी की नई टीम में एक तरफ पुराने और प्रभावशाली चेहरों को जगह मिली है, तो दूसरी तरफ कई नेताओं को पहली बार बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी गई है। बीएल संतोष को राष्ट्रीय महामंत्री संगठन के पद पर बरकरार रखा गया है, जबकि स्मृति ईरानी और बिप्लब देब समेत नए चेहरों को महामंत्री स्तर पर आगे किया गया है।
निष्कर्ष: नितिन नबीन की नई टीम को सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसमें राज्यों की राजनीतिक अहमियत, सामाजिक प्रतिनिधित्व और आगामी चुनावों की जरूरतों का मिश्रण दिखाई देता है। अब इस टीम की असली परीक्षा चुनावी मैदान और बूथ स्तर के संगठन में होगी।

