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Wednesday, January 7, 2026
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TRAI की सिफारिश से बढ़ेगी भारतीय IoT कंपनियों की ताकत, विदेशी SIM मिलेगा मंजूरी

टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सिफारिश जारी की है, जो खास तौर पर उन IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) और M2M (मशीन-टू-मशीन) डिवाइसेज के लिए है जो केवल एक्सपोर्ट के लिए बनाए जाते हैं। TRAI ने विदेशी टेलिकॉम कंपनियों के SIM और eSIM कार्ड्स के उपयोग के लिए एक नया नियामक ढांचा प्रस्तावित किया है। यह कदम भारत में IoT और M2M क्षेत्र की तेजी से बढ़ती मांग और इस सेक्टर में स्पष्ट नियमों की कमी को देखते हुए उठाया गया है। इस प्रस्ताव से कंपनियों को अनावश्यक जटिलताओं से बचाने के लिए “लाइट-टच” प्रणाली लागू करने की बात कही गई है।

यह सिफारिश दूरसंचार विभाग (DoT) की मांग पर आई है, जिसने TRAI से विदेशी SIM/eSIM कार्ड्स के आयात, बिक्री और NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) जारी करने या नवीनीकरण के नियम स्पष्ट करने को कहा था। TRAI ने इसके तहत ‘International M2M SIM Service Authorisation’ नाम से एक नई श्रेणी बनाने की सिफारिश की है। इसके तहत भारतीय कंपनियां विदेशी SIM और eSIM कार्ड्स को कानूनी रूप से हासिल कर सकेंगी और उन डिवाइसेज में उपयोग कर सकेंगी जो अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए निर्मित हैं। इस नई अनुमति प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और सरल बनाया गया है। आवेदन ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे और स्वीकृति अपने आप डिजिटल रूप से जारी की जाएगी।

परीक्षण के लिए सीमित छूट और भारतीय निर्माताओं को मिलेगा बड़ा फायदा

TRAI ने यह भी सुझाव दिया है कि गुणवत्ता जांच और परीक्षण की सुविधा के लिए विदेशी SIM/eSIM कार्ड्स को भारत में अधिकतम छह महीने तक सक्रिय रहने की अनुमति दी जाए। इससे निर्माताओं को अपने उत्पादों का परीक्षण बिना किसी परेशानी के किया जा सकेगा। TRAI ने बताया कि स्मार्ट मीटर, कनेक्टेड व्हीकल्स, इंडस्ट्रियल सेंसर जैसे IoT उपकरण बनाने वाली भारतीय कंपनियों को अक्सर विदेशी SIMs की आवश्यकता होती है ताकि उनके डिवाइसेज भेजे जाने वाले देश में निर्बाध नेटवर्क कनेक्टिविटी मिल सके। इस प्रस्तावित नियम से भारतीय निर्माताओं को अपने उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलेगी और वे बेहतर तरीके से वैश्विक बाजारों में अपने उत्पाद भेज सकेंगे।

सुरक्षा और निर्यात में संतुलन, और ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बल

TRAI ने यह स्पष्ट किया है कि एक मजबूत और पारदर्शी नियामक ढांचा न केवल निर्यात को बढ़ावा देगा बल्कि सुरक्षा और अनुपालन से जुड़ी चिंताओं को भी दूर करेगा। उन्होंने DoT को सलाह दी है कि वह वित्त मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और अन्य संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के साथ मिलकर एक समन्वित नीति विकसित करें। TRAI के अनुसार, यह नया नियामक फ्रेमवर्क सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी मजबूती प्रदान करेगा। इससे भारत IoT और M2M उत्पादों के निर्माण में एक मजबूत वैश्विक केंद्र बन सकेगा, जो देश की घरेलू विनिर्माण क्षमता को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

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