महाराष्ट्र के पालघर जिले में नवरात्र उत्सव में शामिल होने निकले पांच छात्रों के साथ दर्दनाक हादसा हो गया। एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर लौट रहे विद्यार्थियों की बाइक घाट पर फिसलकर गड्ढे में गिर गई। हादसे में दो छात्रों की जान चली गई, जबकि तीन घायल हुए। घटना के बाद स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।
नवरात्र उत्सव से लौटते समय हुआ हादसा
महाराष्ट्र के पालघर जिले के जव्हार तालुका में सोमवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे में दो छात्रों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पांचों छात्र हीरादपाड़ा स्थित गगनगिरी आश्रम स्कूल के छात्र थे। वे बिना किसी को बताए पास के सरसुन गांव में नवरात्र उत्सव में शामिल होने चले गए थे।
पुलिस के अनुसार, सभी पांच छात्र एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर वापस आश्रम लौट रहे थे। इसी दौरान कोंगड़ी घाट पर बाइक फिसल गई और सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरी।
दो छात्रों की मौत, तीन अस्पताल में भर्ती
जव्हार पुलिस के मुताबिक, हादसा 19 अक्टूबर को तड़के करीब 2:30 से 3 बजे के बीच हुआ। मृतकों की पहचान सुमित मोतीराम भिंगल (18) और प्रीतम गणेश पोटिंडा (15) के रूप में हुई है।
घटना की जानकारी वहां से गुजर रहे एक वाहन चालक ने पुलिस को दी। हादसे के बाद घायलों को जव्हार के पतंगशाह कॉटेज अस्पताल पहुंचाया गया। एक छात्र की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी, जबकि दूसरे ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
तीनों घायल छात्रों को बेहतर उपचार के लिए नासिक के जिला अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। प्रशासन के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है और उपचार के दौरान उनमें सुधार देखा जा रहा है।

प्रधानाध्यापक, वार्डन और चौकीदार निलंबित
हादसे के बाद स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर सवाल उठने लगे हैं। पांचों छात्र आखिर इतनी रात को छात्रावास से बाहर कैसे निकल गए? उनकी अनुपस्थिति का पता समय रहते क्यों नहीं चला? इन सवालों के बीच स्कूल के प्रधानाध्यापक, छात्रावास वार्डन और चौकीदार को निलंबित कर दिया गया।
प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य छात्रावास में निगरानी और सुरक्षा से जुड़ी कथित चूकों की जवाबदेही तय करना है।
जांच में सामने आई सुरक्षा संबंधी खामियां
एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (ITDP) की जांच समिति की रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, गैर-आवासीय छात्रों को भी छात्रावास में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा, पहले चेतावनी दिए जाने के बावजूद सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे।
ये निष्कर्ष छात्रावास की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि, पूरी जिम्मेदारी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका का निर्धारण जांच के निष्कर्षों तथा प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
छात्रावास की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
आश्रम स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन और संबंधित प्रशासन पर होती है। रात के समय प्रवेश-निकास की निगरानी, सीसीटीवी कैमरों की नियमित जांच और छात्रों की उपस्थिति का रिकॉर्ड ऐसी घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
निष्कर्ष: पालघर का यह हादसा दो परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति लेकर आया है। तीन अन्य छात्र उपचार के बाद स्वस्थ हों, यही सबसे बड़ी उम्मीद है। साथ ही, यह घटना याद दिलाती है कि छात्रावास की सुरक्षा केवल औपचारिक नियमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। निगरानी में छोटी-सी चूक भी गंभीर परिणाम ला सकती है।

