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Thursday, October 15, 2026
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ताशी शेरपा की 5 साल की सजा बरकरार, नर्मदापुरम कोर्ट ने खारिज की अपील

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिला एवं सत्र न्यायालय ने अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी मामले में ताशी उर्फ ताशी शेरपा की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा सुनाई गई 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा को बरकरार रखा। यह फैसला 17 सितंबर 2026 को सुनाया गया था।

मामला सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और आसपास के इलाकों में बाघ तथा पेंगोलिन के शिकार और उनके अंगों की कथित अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़ा है।

2015 में सामने आया था नेटवर्क

इस मामले की शुरुआत जुलाई 2015 में हुई थी। जांच में मध्य प्रदेश के बैतूल, छिंदवाड़ा और नर्मदापुरम समेत अन्य इलाकों के लोगों की भूमिका सामने आई। जांच एजेंसियों के अनुसार, स्थानीय शिकारी बाघ की खाल, हड्डियां, नाखून, बाल और चर्बी से जुड़े उत्पादों के साथ पेंगोलिन के स्केल एकत्र करते थे।

जांच के मुताबिक, यह सामग्री जेई तमांग तक पहुंचाई जाती थी। इसके बाद इसे अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क में आगे भेजे जाने की बात सामने आई। इस मामले में कुल 36 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

27 आरोपियों को पहले ही हो चुकी सजा

मामले में जांच के दौरान कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। 20 दिसंबर 2022 को नर्मदापुरम की अदालत ने 27 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई थी।

वहीं, ताशी शेरपा और जेई तमांग समेत कुछ आरोपी लंबे समय तक जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर रहे। ताशी के खिलाफ जांच को आगे बढ़ाने में इंटरपोल और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो यानी WCCB से भी सहयोग लिया गया।

ताशी शेरपा की 5 साल की सजा बरकरार, नर्मदापुरम कोर्ट ने खारिज की अपील

नौ साल बाद सिलीगुड़ी से गिरफ्तारी

जांच एजेंसियों के मुताबिक, ताशी शेरपा करीब नौ साल तक फरार रहा। उसे 23 जनवरी 2024 को भारत-नेपाल सीमा के पास पश्चिम बंगाल के पानी टंकी, सिलीगुड़ी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था।

गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से कथित तौर पर फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेज, नेपाली और भूटानी मुद्रा, विदेशी करेंसी तथा तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए थे।

चीन तक नेटवर्क की जांच

जांच एजेंसी के अनुसार, ताशी शेरपा से जुड़े नेटवर्क की कड़ियां भारत के अलावा नेपाल, भूटान और चीन तक पहुंचती थीं। जांच में बाघ की हड्डियों और पेंगोलिन स्केल की अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े पहलुओं को खंगाला गया।

मामले में साइबर डेटा और कॉल डिटेल समेत अन्य दस्तावेजी साक्ष्य भी जुटाए गए। STSF की ओर से अदालत में मौखिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जिन्हें जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले में स्वीकार किया।

वैज्ञानिक जांच का भी इस्तेमाल

इस मामले की जांच में पारंपरिक पुलिस जांच के साथ वैज्ञानिक तरीकों का भी इस्तेमाल किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ताशी शेरपा का BEOS ब्रेन मैपिंग और नार्को एनालिसिस कराया गया था। जांच एजेंसी ने इन प्रक्रियाओं से प्राप्त जानकारी के साथ साइबर डेटा को भी जांच का हिस्सा बनाया।

हालांकि, वैज्ञानिक परीक्षणों से जुड़ी जानकारी को अदालत द्वारा स्वीकार किए गए साक्ष्यों के व्यापक संदर्भ में देखना जरूरी है। अदालत ने अपने फैसले में STSF की ओर से प्रस्तुत मौखिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को पर्याप्त माना।

2025 में महिला तस्कर की गिरफ्तारी

इस नेटवर्क की जांच आगे भी जारी रही। 3 दिसंबर 2025 को WCCB और STSF की संयुक्त टीम ने सिक्किम के लाचंग क्षेत्र से महिला आरोपी यांगचेन लाचुगपा को गिरफ्तार किया था। उसे बाद में भोपाल लाकर नर्मदापुरम अदालत में पेश किया गया।

जांच के दौरान अधिकारियों ने कथित तौर पर विदेशी सप्लाई चेन, बैंक लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की।

अब ताशी की अपील भी खारिज

ताशी शेरपा ने निचली अदालत की सजा के खिलाफ अपील दायर की थी। लेकिन नर्मदापुरम जिला एवं सत्र न्यायालय ने 17 सितंबर 2026 को अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा प्रभावी बनी रही।

यह फैसला सतपुड़ा क्षेत्र से जुड़े वन्यजीव अपराध के उस मामले में आया है, जिसकी जांच स्थानीय शिकारियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क तक पहुंची थी।

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