घर खरीदने का सपना देखने वाले हजारों लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट में चल रही यह सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अदालत अब उस व्यवस्था पर सवाल उठा रही है, जिसमें खरीदारों को फ्लैट नहीं मिलता, लेकिन उन्हें वर्षों तक बैंक की ईएमआई चुकानी पड़ती है।
क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका में केंद्र सरकार से ऐसी नीति बनाने की मांग की गई है, जिसके तहत ‘सबवेंशन योजना’ में फ्लैट न मिलने की स्थिति में नुकसान केवल खरीदार पर न पड़े। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि परियोजना पूरी नहीं होती या खरीदार को घर नहीं मिलता, तो बैंक और बिल्डर दोनों को भी वित्तीय जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
आखिर क्या होती है सबवेंशन योजना?
रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रचलित सबवेंशन योजना के तहत बैंक या वित्तीय संस्थान स्वीकृत लोन की राशि सीधे बिल्डर को दे देते हैं। इसके बदले बिल्डर यह वादा करता है कि जब तक फ्लैट का कब्जा नहीं दिया जाता, तब तक वह ईएमआई का भुगतान करेगा। समस्या तब पैदा होती है जब परियोजना रुक जाती है और बिल्डर ईएमआई देना बंद कर देता है।

खरीदार क्यों फंस जाते हैं?
ऐसी स्थिति में बैंक बकाया ईएमआई की मांग सीधे फ्लैट खरीदारों से करने लगते हैं। न तो उन्हें घर मिलता है और न ही कर्ज से राहत। कई खरीदार वर्षों तक किराया और ईएमआई दोनों का बोझ उठाने को मजबूर हो जाते हैं। यही वजह है कि यह मुद्दा लंबे समय से घर खरीदारों के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले पर नोटिस जारी करते हुए केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत ने फिलहाल याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई पर रोक लगाने का निर्देश भी दिया है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिका में कहा गया है कि रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं के लिए विशेष ऋण राहत योजना बनाई जाए। साथ ही निर्माण की वास्तविक प्रगति के अनुसार ही बैंक लोन की राशि जारी करें, ताकि खरीदारों का जोखिम कम हो सके। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि फ्लैट न मिलने की स्थिति में बैंक और बिल्डर दोनों बराबर जिम्मेदारी उठाएं।
लाखों खरीदारों पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण आदेश देता है, तो इसका असर देशभर के लाखों फ्लैट खरीदारों पर पड़ सकता है। इससे रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही बढ़ेगी और भविष्य में खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।

