देश की चुनावी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सूत्रों के अनुसार विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नया प्रस्ताव लाने की रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके समेत कई प्रमुख दलों के वरिष्ठ सांसद इस पहल में शामिल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस बार विपक्ष एक साझा मोर्चा बनाकर अधिक राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
करीब 200 सांसदों के समर्थन का लक्ष्य
विपक्षी दल इस बार अपने कदम को और मजबूत करने के लिए व्यापक समर्थन जुटाने में लगे हैं। जानकारी के अनुसार लगभग 200 सांसदों के हस्ताक्षर हासिल करने की कोशिश की जा रही है ताकि प्रस्ताव को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। विपक्ष का दावा है कि पहले भी इस तरह के नोटिस खारिज किए जा चुके हैं, लेकिन अब वे इस मुद्दे को संसद में और मजबूती से उठाना चाहते हैं।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठे सवाल
विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और कई निर्णयों में पक्षपात की झलक दिखाई देती है। साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि कई महत्वपूर्ण फैसले सरकार के प्रभाव में लिए जाते हैं, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर प्रश्न उठते हैं। विशेष मतदाता सूची सुधार जैसी प्रक्रियाओं पर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
पहले भी खारिज हो चुके हैं ऐसे प्रस्ताव
इससे पहले संसद के दोनों सदनों के अध्यक्षों ने ऐसे ही प्रस्तावों को खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि किसी भी संवैधानिक पदाधिकारी को हटाने के लिए गंभीर कदाचार के ठोस प्रमाण जरूरी होते हैं। केवल राजनीतिक असहमति या प्रशासनिक निर्णयों पर मतभेद के आधार पर कार्रवाई संभव नहीं है। अब एक बार फिर यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में गर्म हो गया है और आने वाले दिनों में संसद में इस पर तीखी बहस होने की संभावना है।

