टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 चरण में भारत और जिम्बाब्वे का अहम मुकाबला आज एम ए चिदंबरम स्टेडियम, चेन्नई में खेला जाएगा। टीम इंडिया के लिए यह मैच किसी भी हाल में जीतना जरूरी है क्योंकि पिछले मुकाबले में साउथ अफ्रीका से 76 रन की हार के बाद सेमीफाइनल की राह मुश्किल हो गई है। दोनों टीमें अपने पिछले सुपर-8 मुकाबले हारकर यहां पहुंची हैं, और मैच का परिणाम सीधे तौर पर भारत की क्वालीफाइंग संभावनाओं को प्रभावित करेगा।
चेपॉक में ‘ड्यू क्योर’ के साथ खास तैयारी
चेन्नई में रात के मैचों में ओस का असर हमेशा बड़ी चुनौती रहा है। इस बार ग्राउंड स्टाफ ने इसे ध्यान में रखते हुए ‘ड्यू क्योर’ नामक केमिकल का छिड़काव किया है। यह इम्पोर्टेड केमिकल अमेरिका से मंगवाया गया है और इसका मकसद रात के समय पिच पर ओस का असर कम करना है। ओस आने से गेंद गीली हो जाती है, जिससे गेंदबाजों का कंट्रोल कमजोर होता है और स्पिनर्स के लिए बल्लेबाजों को पकड़ पाना मुश्किल हो जाता है।

ओस के असर को कम करने की रणनीति
मौसम विभाग के अनुसार मैच के दौरान ह्यूमिडिटी 80 से 90 प्रतिशत तक रहने की संभावना है। इसलिए ग्राउंड स्टाफ ने मंगलवार और बुधवार को पिच पर ‘ड्यू क्योर’ का छिड़काव किया और मैच से पहले फिर से इसे इस्तेमाल करने की योजना बनाई है। टॉस जीतने वाली टीम के लिए इस बार रणनीति अहम होगी क्योंकि स्पिन गेंदबाजों के लिए पिच आमतौर पर मददगार होती है, लेकिन ओस आने के बाद बल्लेबाजों को दूसरी पारी में लाभ मिल सकता है।
मुकाबले में टॉस और रणनीति का महत्व
चेपॉक में टॉस जीतना रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। गीली गेंद के कारण स्लोअर बॉल और यॉर्कर डालना मुश्किल हो जाता है। इसलिए टॉस जीतने वाली टीम अक्सर पहले गेंदबाजी करना पसंद करती है, ताकि दूसरी पारी में बल्लेबाजी का फायदा उठा सके। अब देखना यह है कि क्या ‘ड्यू क्योर’ मैच के दौरान ओस के असर को कम कर पाएगा और भारत और जिम्बाब्वे के बीच मुकाबले को बराबरी का बना पाएगा। फैंस इस मैच को लेकर उत्साहित हैं और हर पारी की हर गेंद पर नजर होगी।

